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मंगा की जापानी शब्द सूची

422 phrases

422 शब्द, हर एक के साथ उच्चारण, अर्थ और नेटिव ऑडियो। शब्द पर टैप करें तो दोहराता है; नीचे के वाक्य पर टैप करें तो शब्द को वाक्य में सुनें।

इन शब्दों का कान से अभ्यास करें
  1. हरकत और नज़रमेल खाना; बननाहमारी आँखें मिल गईं।
  2. हँसना और रोनालालआपकी आँखें लाल हो रही हैं।
  3. सीरीज़ पर बातचीतप्रकट करना; खोलनाआखिरकार सच सामने आ ही गया ना।
  4. रोशनी, बिखराव और मात्राचमकीला; उजलाखिड़की खोलते ही उजाला हो जाता है।
  5. शरीर की आवाज़ेंबढ़ना; ऊपर जानामेरी साँस फूल गई।
  6. चीख़कर कही बातेंहार मानना; छोड़ देनाहार मत मान!
  7. चीख़कर कही बातेंखाली रखनाकृपया रास्ता दीजिए।
  8. चेहरे के भावखोलनाउनका मुँह खुला का खुला रह गया।
  9. सीरीज़ पर बातचीतलालायित होनाऐसे रोमांच के लिए मन तरसता है।
  10. हरकत और नज़रसुबहसुबह से भागदौड़ लगी हुई है।
  11. सीरीज़ पर बातचीतपसीनाआखिर तक मेरी मुट्ठियाँ पसीने से भीगी रहीं।
  12. भावनाओं की ध्वनिबेचैन होना; घबरानाघबराइए मत।
  13. शरीर की आवाज़ेंसिरमेरे सिर में हथौड़े बज रहे हैं।
  14. स्पर्श और स्वादआसानी से; सहज हीआज मन कुछ हल्का खाने का है।
  15. सीरीज़ पर बातचीतजोशीला; गर्मअरे यार, क्या ज़बरदस्त जोशीला मोड़ था।
  16. आश्चर्य और हामीबाद मेंमैं बाद में इसकी जाँच करूँगा।
  17. चेहरे के भावबाद मेंचलिए, बाद में बात करते हैं।
  18. सीरीज़ पर बातचीतएनिमेतुम एनिमे पसंद करते हो या मूल मंगा?
  19. किरदारों की भाषाज़्यादा नहींअसल लोग इसे बहुत कम इस्तेमाल करते हैं।
  20. पन्ने पर ध्वनियाँबारिश; वर्षाबारिश झमाझम हो रही है।
  21. स्पर्श और स्वादधोनाधोने के बाद यह मुलायम हो गया।
  22. आश्चर्य और हामीधन्यवादबताने के लिए शुक्रिया।
  23. हरकत और नज़रचलना; पैदल जानाचलिए, यूँ ही टहलते हैं।
  24. किरदारों की भाषातुम (प्राचीन); स्वामीतू, पुरातन संबोधन
  25. हरकत और नज़रघबराना; हड़बड़ानाकृपया हड़बड़ाइए मत।
  26. चेहरे के भावमुँह खुला रह जानाउनका मुँह खुला का खुला रह गया।
  27. रूखी बोलीज़्यादा बोल जानामैंने ज़रूरत से ज़्यादा कह दिया।
  28. शरीर की आवाज़ेंसाँसमेरी साँस फूल गई।
  29. सीरीज़ पर बातचीतजीने का तरीक़ाउन समुद्री लुटेरों का जीने का ढंग मुझे भाता है।
  30. सीरीज़ पर बातचीतजीनाआज़ादी से जीना ही सबसे बढ़िया है।
  31. चीख़कर कही बातेंजल्दी करनाकृपया जल्दी कीजिए।
  32. शरीर की आवाज़ेंदर्दनाक; दर्ददबाने पर दर्द होता है।
  33. शरीर की आवाज़ेंदर्दकिस तरह का दर्द है?
  34. स्पर्श और स्वादखराब होनामुझे लगता है यह खराब हो चुका है।
  35. हँसना और रोनाभरा हुआमन इतना भर आया कि कुछ कह न सका।
  36. किरदारों की भाषानापसंदमुझे यह नहीं करना।
  37. भावनाओं की ध्वनिचिड़चिड़ाकृपया चिढ़िए मत।
  38. रोशनी, बिखराव और मात्राडालना; रखनाकृपया भरपूर डालिए।
  39. किरदारों की भाषामिलने जाना; पूछना (विनम्र)मैं ही आऊँगा।
  40. भावनाओं की ध्वनिउमंग भरामन ख़ुशी से चहक रहा है।
  41. चीख़कर कही बातेंचलानाकृपया उन्हें हिलाइए मत।
  42. चीख़कर कही बातेंचलना; हिलनाहिलना मत!
  43. हरकत और नज़रपीछेमैंने पीछे मुड़कर देखा।
  44. रूखी बोलीझूठझूठ बोलता है!
  45. आश्चर्य और हामीसंदेह करनामुझे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ।
  46. चेहरे के भावसिर झुकानासिर झुकाए हुए
  47. शरीर की आवाज़ेंफैलना (संक्रमण)कहीं आपको न लग जाए, इसलिए।
  48. चेहरे के भावखुश; प्रसन्नआप खुश लग रहे हैं।
  49. हँसना और रोनाखुशी के आँसूये खुशी के आँसू हैं।
  50. हरकत और नज़रइधर-उधर भटकनावे स्टेशन के सामने इधर-उधर मँडरा रहे थे।
  51. आश्चर्य और हामीअफ़वाहमुझे लगता है यह महज़ अफवाह है।
  52. किरदारों की भाषाहाँ (अनौपचारिक)हाँ, सही कह रहे हो।
  53. भावनाओं की ध्वनितंग; ऊबमैं इससे ऊब चुका हूँ।
  54. हरकत और नज़रड्राइविंग; वाहन चलानायातायात रेंग-रेंगकर चल रहा है।
  55. चेहरे के भावमुस्कानकितनी प्यारी मुस्कान है।
  56. हरकत और नज़रस्टेशनवे स्टेशन के सामने इधर-उधर मँडरा रहे थे।
  57. आश्चर्य और हामीअरे?; क्या?क्याऽऽ?
  58. सीरीज़ पर बातचीतपीछा करनामुझे सपनों के पीछे भागने वाली कहानियाँ पसंद हैं।
  59. पन्ने पर ध्वनियाँबड़ाबहुत तेज़ आवाज़ हुई।
  60. हँसना और रोनाठहाकाहम सब ठहाके मारकर हँसे।
  61. आश्चर्य और हामीअजीब; मज़ेदारयह तो अजीब है।
  62. पन्ने पर ध्वनियाँरखना; छोड़नाकृपया इसे हौले से रखिए।
  63. हँसना और रोना(मुकदमा) दायर करना; उत्पन्न करनाकृपया मुझे जगा दीजिए।
  64. रूखी बोलीग़ुस्सा होनाक्या आप नाराज़ हैं?
  65. किरदारों की भाषाछोटा; नन्हाअगर कोई वयस्क इसे बोले, तो बचकाना लगता है।
  66. भावनाओं की ध्वनिथमना; शांत होनामेरी चिढ़ शांत ही नहीं हो रही।
  67. शरीर की आवाज़ेंशांत होना; कम होनाधीरे-धीरे कम होता जा रहा है।
  68. आश्चर्य और हामीबताना; सिखानाबताने के लिए शुक्रिया।
  69. किरदारों की भाषाकुलीन कन्यायह कुलीन युवती की भाषा-शैली है।
  70. शरीर की आवाज़ेंदबाना; धकेलनादबाने पर दर्द होता है।
  71. सीरीज़ पर बातचीतसमर्थन करना (पसंदीदा)तुम्हारा पसंदीदा किरदार कौन है?
  72. भावनाओं की ध्वनिशांत होनाकृपया शांत हो जाइए।
  73. चीख़कर कही बातेंशांत हो पाना; शांत रहोशांत हो जा!
  74. पन्ने पर ध्वनियाँआवाज़; ध्वनिबहुत तेज़ आवाज़ हुई।
  75. सीरीज़ पर बातचीतआदमीइसमें वह लड़कपन के सपनों वाला रोमांस है ना।
  76. किरदारों की भाषावयस्कअगर कोई वयस्क इसे बोले, तो बचकाना लगता है।
  77. आश्चर्य और हामीआश्चर्ययह एक सुखद आश्चर्य था।
  78. शरीर की आवाज़ेंपेटमेरे पेट में मरोड़-सा दर्द हो रहा है।
  79. रूखी बोलीयाद करनायाद रखना, हिसाब बाकी है।
  80. रूखी बोलीतू (अशिष्ट)यह बात तुझसे तो सुनना ही नहीं चाहता।
  81. हँसना और रोनादिलचस्प; मज़ेदारयह तो हद से ज़्यादा मज़ेदार है।
  82. हरकत और नज़रतैरनाउसकी आँखें भटक रही हैं—वह झूठ बोल रहा है।
  83. चीख़कर कही बातेंमैं (पुरुष, अनौपचारिक)मैं जाऊँगा।
  84. पन्ने पर ध्वनियाँमंज़िलयह ऊपर की मंज़िल से आ रही है।
  85. सीरीज़ पर बातचीतसमुद्री डाकूउन समुद्री लुटेरों का जीने का ढंग मुझे भाता है।
  86. चेहरे के भावचेहरायह निराशा से भरा चेहरा है।
  87. चीख़कर कही बातेंतैयारी; दृढ़ संकल्पतैयार हो जा!
  88. रोशनी, बिखराव और मात्राछायापरछाइयाँ लंबी हो गई हैं।
  89. रूखी बोलीमात्रा; हदअब बस भी कर।
  90. पन्ने पर ध्वनियाँछाताछाता ले जाना बेहतर होगा।
  91. चीख़कर कही बातेंआग (हादसा)आग लगी है!
  92. पन्ने पर ध्वनियाँहवाहवा सन-सन कर चल रही है।
  93. चेहरे के भावकड़ा; सख़्तचेहरे के भाव कड़े हैं।
  94. हरकत और नज़रसमेटना; सँभालनाउन्होंने सब कुछ फुर्ती से समेट दिया।
  95. सीरीज़ पर बातचीतशानदार; कूलउस किरदार का संकल्प बड़ा दमदार है।
  96. रूखी बोलीमनमानी; स्वेच्छाचारजो जी में आए कर।
  97. चीख़कर कही बातेंज़रूर; अवश्यमैं ज़रूर लौटूँगा।
  98. सीरीज़ पर बातचीतदेवता; ईश्वरइस बार का एपिसोड तो एकदम लाजवाब था।
  99. पन्ने पर ध्वनियाँगरज; बिजलीबिजली गरज रही है।
  100. शरीर की आवाज़ेंनाक साफ़ करना; काटनामैं नाक साफ करता हूँ।
  101. शरीर की आवाज़ेंहल्कादर्द अपेक्षाकृत हल्का है।
  102. पन्ने पर ध्वनियाँसूखनाधुले कपड़े सूख ही नहीं रहे।
  103. सीरीज़ पर बातचीतअनुभूतिसमुद्री सफर का वह रोमांच बेमिसाल है।
  104. रूखी बोलीसंबंधमेरा इससे कोई लेना-देना नहीं।
  105. शरीर की आवाज़ेंएहसास; अनुभूतिटीस मारने जैसा दर्द है।
  106. सीरीज़ पर बातचीतपूर्णइस बार का एपिसोड तो एकदम लाजवाब था।
  107. आश्चर्य और हामीग़लतफ़हमीमुझसे गलतफहमी हो गई थी।
  108. चेहरे के भावनिराशयह निराशा से भरा चेहरा है।
  109. भावनाओं की ध्वनिनिराशबड़ी निराशा हुई।
  110. हँसना और रोनासहनशीलता; बर्दाश्तमैंने खुद को रोक लिया।
  111. शरीर की आवाज़ेंसिर में हथौड़े जैसा दर्दमेरे सिर में हथौड़े बज रहे हैं।
  112. रूखी बोलीसुनकर समझ पानासुनकर समझ लेना ही काफी है।
  113. चीख़कर कही बातेंपूछ सकना; सुन सकनासुन!
  114. स्पर्श और स्वादसमय सीमा; अवधिचलिए, इसकी तारीख देख लेते हैं।
  115. चेहरे के भावमिज़ाजलगता है उनका मिज़ाज खराब है।
  116. किरदारों की भाषासुनाई देनाअगर कोई वयस्क इसे बोले, तो बचकाना लगता है।
  117. शरीर की आवाज़ेंघाव; चोटघाव में जलन हो रही है।
  118. सीरीज़ पर बातचीतबंधन; रिश्ताउनके बीच के उस रिश्ते ने मुझे रुला दिया।
  119. रोशनी, बिखराव और मात्राठीक से; व्यवस्थितचलिए, इन्हें सलीके से कतार में लगाते हैं।
  120. हँसना और रोनातबीयत; मनोदशामेरा रोने का मन कर रहा है।
  121. स्पर्श और स्वादसुखदछूने में बड़ा अच्छा लगता है।
  122. सीरीज़ पर बातचीतपात्रतुम्हारा पसंदीदा किरदार कौन है?
  123. हरकत और नज़रअचानक; तत्कालवे अचानक रुक गए।
  124. चीख़कर कही बातेंआपातकालीन; प्राथमिक चिकित्साकृपया एम्बुलेंस बुलाइए।
  125. हरकत और नज़रइधर-उधर देखनावे चारों ओर नज़रें दौड़ा रहे थे।
  126. रोशनी, बिखराव और मात्राटिमटिमातातारे जगमगा रहे हैं।
  127. शरीर की आवाज़ेंतेज़ चुभता दर्दमेरे पेट में मरोड़-सा दर्द हो रहा है।
  128. सीरीज़ पर बातचीतनिषेध; मनाहीप्लीज़, कहानी मत बता देना!
  129. रोशनी, बिखराव और मात्राठसाठसडिब्बा ठसाठस भरा हुआ है।
  130. चेहरे के भावखी-खी (हँसी)हल्की-सी हँसी छूट जाना
  131. किरदारों की भाषादेना (आदरसूचक)कृपया मुझे दीजिए।
  132. चेहरे के भावमुँह; बोलने का ढंगउनका मुँह खुला का खुला रह गया।
  133. हँसना और रोनासुबकनारोने के बाद नाक सुड़कना
  134. हँसना और रोनागहरी (नींद)मैं गहरी नींद सोया।
  135. चीख़कर कही बातेंचोटकोई घायल है।
  136. किरदारों की भाषानाटकयह ऐतिहासिक नाटकों में अक्सर सुनने को मिलता है।
  137. शरीर की आवाज़ेंस्वस्थ; तंदुरुस्तअब मुझमें फिर से जान आ रही है।
  138. सीरीज़ पर बातचीतमूल कृतितुम एनिमे पसंद करते हो या मूल मंगा?
  139. सीरीज़ पर बातचीतइस तरह काऐसे रोमांच के लिए मन तरसता है।
  140. सीरीज़ पर बातचीतसमुद्री यात्रासमुद्री सफर का वह रोमांच बेमिसाल है।
  141. सीरीज़ पर बातचीतविचार; विवेचनइस पर तो थ्योरी बनाने का मन कर जाता है।
  142. किरदारों की भाषावृद्धावस्थाअसल के बुज़ुर्ग सामान्य ढंग से ही बोलते हैं।
  143. पन्ने पर ध्वनियाँआवाज़आपकी आवाज़ बहुत धीमी है।
  144. स्पर्श और स्वादजली हुई गंधकुछ जलने की गंध आ रही है।
  145. हरकत और नज़रचोरी-छिपेमेरी पीठ पीछे चोरी-छिपे कुछ मत कीजिए।
  146. स्पर्श और स्वादगाढ़ा; भारीसूप गाढ़ा और भरपूर है।
  147. किरदारों की भाषाबच्चाबच्चे इसी तरह बोलते हैं।
  148. किरदारों की भाषापरेशान होनाअरे, यह तो मुश्किल हो गई।
  149. चेहरे के भावरोकना; दबानामैंने हँसी रोक ली।
  150. भावनाओं की ध्वनिसबक़ सीखनामन को गरमाहट मिली।
  151. पन्ने पर ध्वनियाँ(साँस) रोकना; मारनामैंने साँस रोक ली।
  152. स्पर्श और स्वादआवरण (तलने का); वस्त्रऊपर की परत बड़ी कुरकुरी है।
  153. चेहरे के भावडरावनाउनका चेहरा डरावना लग रहा है।
  154. सीरीज़ पर बातचीतइस बारइस बार का एपिसोड तो एकदम लाजवाब था।
  155. स्पर्श और स्वादसुनहरा भूरायह अच्छी तरह सुनहरा सिक गया।
  156. रोशनी, बिखराव और मात्राअस्त-व्यस्तकमरा बिलकुल बेतरतीब है।
  157. हरकत और नज़रआलसी पड़े रहनाछुट्टी के दिन मैं कुछ नहीं करता, बस पड़ा रहता हूँ।
  158. सीरीज़ पर बातचीतसर्वोच्च; सबसे बढ़ियाआज़ादी से जीना ही सबसे बढ़िया है।
  159. सीरीज़ पर बातचीतअंतिम; आख़िरआखिर तक मेरी मुट्ठियाँ पसीने से भीगी रहीं।
  160. रोशनी, बिखराव और मात्राबटुआमेरा बटुआ बिलकुल खाली है।
  161. चीख़कर कही बातेंपीछे हटना; नीचे जानापीछे हट!
  162. स्पर्श और स्वादकुरकुराऊपर की परत बड़ी कुरकुरी है।
  163. भावनाओं की ध्वनिअभी-अभी; थोड़ी देर पहलेआप कुछ देर से बेचैन दिख रहे हैं।
  164. हरकत और नज़रजल्दी सेचलिए, जल्दी से शुरू करते हैं।
  165. स्पर्श और स्वादठंडा हो जानाठंडा होने पर यह रूखा हो जाता है।
  166. स्पर्श और स्वादछूनाज़रा छूकर देखिए।
  167. पन्ने पर ध्वनियाँमूसलाधारबारिश झमाझम हो रही है।
  168. भावनाओं की ध्वनिशांतकितना शांत है, अच्छा लगता है।
  169. किरदारों की भाषाप्रकृति; प्राकृतिकयही स्वाभाविक रूप है।
  170. स्पर्श और स्वादमुरझायामुरझाई हुई सब्ज़ी
  171. रोशनी, बिखराव और मात्रारख देनाआपने इसे कहाँ रख दिया?
  172. पन्ने पर ध्वनियाँबंद होनादरवाज़ा धड़ाम से बंद हो गया।
  173. भावनाओं की ध्वनिगहराई सेयह बात मैं गहराई से महसूस करता हूँ।
  174. आश्चर्य और हामीसबूत; प्रमाणक्या इसका कोई सबूत है?
  175. सीरीज़ पर बातचीतईमानदार; सच कहूँ तोसच कहूँ तो मैं थोड़ा रो पड़ा।
  176. किरदारों की भाषाउपन्यासयह उपन्यासों में भी आता है।
  177. चीख़कर कही बातेंमुक़ाबलाचल, आर-पार हो जाए!
  178. स्पर्श और स्वादसर्वोत्तम स्वाद (समाप्ति)चलिए, इसकी तारीख देख लेते हैं।
  179. स्पर्श और स्वादभोजनइसका बनावटी स्वाद अच्छा है ना।
  180. रूखी बोलीपहली मुलाक़ातपहली मुलाकात में "watashi" कहना सुरक्षित रहता है।
  181. शरीर की आवाज़ेंथकी (आँखें)मेरी आँखें भारी और चुँधली हो रही हैं।
  182. शरीर की आवाज़ेंछूँ (आछूँ)आक्छी
  183. आश्चर्य और हामीजाँचना; पता लगानामैं बाद में इसकी जाँच करूँगा।
  184. आश्चर्य और हामीशायद; हो सकता हैशायद ऐसा ही हो।
  185. भावनाओं की ध्वनिगहरी साँसचलिए, गहरी साँस लेते हैं।
  186. चीख़कर कही बातेंविश्वास करनामुझे तुम पर भरोसा है।
  187. सीरीज़ पर बातचीतसच्चाई; असलियतआखिरकार सच सामने आ ही गया ना।
  188. भावनाओं की ध्वनिहृदय; दिलयह तो दिल के लिए ठीक नहीं।
  189. आश्चर्य और हामीचिंताचुप रहेंगे तो बोलने वाला चिंतित हो जाता है।
  190. किरदारों की भाषायुग; ज़मानायह ऐतिहासिक नाटकों में अक्सर सुनने को मिलता है।
  191. किरदारों की भाषावास्तव मेंअसल ज़िंदगी में इसका प्रयोग नहीं होता।
  192. हरकत और नज़रएकटक; स्थिरवे टकटकी लगाए देख रहे हैं।
  193. किरदारों की भाषावास्तविक अस्तित्वअसल लोग इसे बहुत कम इस्तेमाल करते हैं।
  194. चीख़कर कही बातेंबाधा; रुकावटतू रास्ते में आ रहा है।
  195. रूखी बोलीपर्याप्त; काफ़ीसुनकर समझ लेना ही काफी है।
  196. रोशनी, बिखराव और मात्राक्रम; बारीक्रम बिलकुल गड़बड़ है।
  197. सीरीज़ पर बातचीतस्वतंत्रता; आज़ादीआज़ादी से जीना ही सबसे बढ़िया है।
  198. हँसना और रोनामज़ाकमैं मज़ाक कर रहा हूँ।
  199. हरकत और नज़रघूरनाकृपया मुझे ऐसे मत घूरिए।
  200. शरीर की आवाज़ेंझनझनाहटसुन्न होकर झनझनाना
  201. भावनाओं की ध्वनिभावुक; द्रवितमन भर आया।
  202. सीरीज़ पर बातचीतपसंदमुझे सपनों के पीछे भागने वाली कहानियाँ पसंद हैं।
  203. किरदारों की भाषाग़ज़ब; ज़बरदस्तवाह, कमाल है!
  204. रोशनी, बिखराव और मात्राएकदम खालीमेरा बटुआ बिलकुल खाली है।
  205. रोशनी, बिखराव और मात्रातरोताज़ा; साफ़-सुथराअब कहीं ज़्यादा साफ लग रहा है।
  206. स्पर्श और स्वादफिसलनाफिसलन है, ज़रा संभलकर।
  207. शरीर की आवाज़ेंमाफ़ कीजिएआपको यह सब देखना-सुनना पड़ा, क्षमा कीजिए।
  208. स्पर्श और स्वादसूपसूप गाढ़ा और भरपूर है।
  209. शरीर की आवाज़ेंटीस; धड़कता दर्दटीस मारने जैसा दर्द है।
  210. शरीर की आवाज़ेंखाँसीमेरी खाँसी रुक ही नहीं रही।
  211. भावनाओं की ध्वनिरीढ़मेरी रीढ़ में सिहरन दौड़ गई।
  212. चेहरे के भावव्याख्या; विवरणमैं एक बार फिर समझाता हूँ।
  213. पन्ने पर ध्वनियाँधुलाईधुले कपड़े सूख ही नहीं रहे।
  214. सीरीज़ पर बातचीतसभी खंडमेरे पास मंगा के सारे खंड पूरे हैं।
  215. रूखी बोलीऐसा; वैसाअच्छा, तो बात यह है।
  216. चीख़कर कही बातेंवहाँबस, यहीं तक।
  217. पन्ने पर ध्वनियाँधीरे से; हौले सेकृपया इसे हौले से रखिए।
  218. रोशनी, बिखराव और मात्राख़ालीआसमान भारी और धुँधला है।
  219. हरकत और नज़र(नज़र) फेरनामैंने नज़रें फेर लीं।
  220. सीरीज़ पर बातचीतसजाकर रखनामेरे पास मंगा के सारे खंड पूरे हैं।
  221. हरकत और नज़रअब समय हो गया; जल्द हीबहुत सावधानी से, धीरे-धीरे
  222. भावनाओं की ध्वनिबेचैनआप कुछ देर से बेचैन दिख रहे हैं।
  223. रूखी बोलीऐसा; उस तरह काऐसा हो ही नहीं सकता।
  224. भावनाओं की ध्वनिसिहरनमेरी रीढ़ में सिहरन दौड़ गई।
  225. भावनाओं की ध्वनिसिहरन के साथमेरी रूह काँप गई।
  226. सीरीज़ पर बातचीतज़ोरो (पात्र)मैं तो ज़ोरो की टीम में हूँ।
  227. आश्चर्य और हामीकठिन; मुश्किलआपके लिए बहुत कठिन रहा होगा।
  228. आश्चर्य और हामीनिश्चित; पक्काअच्छा, सचमुच ऐसा ही है।
  229. आश्चर्य और हामीपुष्टि करना; जाँचनाक्या मैं जाँच लूँ?
  230. चीख़कर कही बातेंबचाना; मदद करनाबचाओ!
  231. चेहरे के भावस्तब्ध खड़े रहनावे जहाँ थे वहीं जड़ हो गए।
  232. हरकत और नज़ररुकना; ठहरनावे अचानक रुक गए।
  233. रोशनी, बिखराव और मात्राभरपूरकृपया भरपूर डालिए।
  234. सीरीज़ पर बातचीतखड़ा होना; ग़ुस्सा आनासच में मेरे रोंगटे खड़े हो गए।
  235. पन्ने पर ध्वनियाँखड़ा हो सकनाकृपया आवाज़ मत कीजिए।
  236. हँसना और रोनामज़ेदार; आनंददायकबहुत मज़ा आया।
  237. भावनाओं की ध्वनिप्रतीक्षा; आनंदकल का इंतज़ार करते हुए मन उत्साह से भरा है।
  238. चीख़कर कही बातेंअनुरोध करना; कहनाआगे का ज़िम्मा तुम्हारा।
  239. सीरीज़ पर बातचीतअसहनीयसमुद्री सफर का वह रोमांच बेमिसाल है।
  240. चेहरे के भावआह; उसाँसउन्होंने आह भरी।
  241. रोशनी, बिखराव और मात्राकाफ़ी होनाइतना काफी है।
  242. सीरीज़ पर बातचीतएकल पुस्तक (खंड)मेरे पास मंगा के सारे खंड पूरे हैं।
  243. हरकत और नज़रठीक; कोई बात नहींकोई जल्दी नहीं, आराम से कीजिए।
  244. आश्चर्य और हामीचुप रहनाचुप रहेंगे तो बोलने वाला चिंतित हो जाता है।
  245. शरीर की आवाज़ेंधीरे-धीरेधीरे-धीरे कम होता जा रहा है।
  246. पन्ने पर ध्वनियाँछोटाआपकी आवाज़ बहुत धीमी है।
  247. हरकत और नज़रपास आना; नज़दीक आनामैं चुपचाप पास गया।
  248. रूखी बोलीअलग होना; ग़लत होनाऐसा नहीं है ना।
  249. सीरीज़ पर बातचीतथोड़ा; ज़रासच कहूँ तो मैं थोड़ा रो पड़ा।
  250. रोशनी, बिखराव और मात्राथोड़ा साकृपया बस ज़रा-सा दीजिए।
  251. रोशनी, बिखराव और मात्राबिखरा होनासब कुछ बिखरा पड़ा है
  252. हरकत और नज़रएक झलकमैंने उसे एक झलक देख लिया।
  253. सीरीज़ पर बातचीतआख़िरकारआखिरकार सच सामने आ ही गया ना।
  254. किरदारों की भाषाइस्तेमाल करनाअसल ज़िंदगी में इसका प्रयोग नहीं होता।
  255. चेहरे के भावथकनाशायद वे थके हुए हों।
  256. सीरीज़ पर बातचीतअगलाआगे क्या होगा, यह जानने की बेचैनी हद से ज़्यादा है।
  257. रोशनी, बिखराव और मात्रामेज़; डेस्कमैंने मेज़ साफ कर दी।
  258. चेहरे के भावबनावटी मुस्कानयह बनावटी मुस्कान है।
  259. रूखी बोली(बत्ती) जलानाझूठ बोलता है!
  260. स्पर्श और स्वादलगाना; ध्यान देनाफिसलन है, ज़रा संभलकर।
  261. सीरीज़ पर बातचीतआगे का भागआगे का हिस्सा जल्दी पढ़ने को बेताब हूँ!
  262. चेहरे के भावप्रभावित होकर साथ करनादेखा-देखी मुझे भी हँसी आ गई।
  263. स्पर्श और स्वादफिसलनदार; चिकनाफर्श फिसलनभरा है।
  264. हरकत और नज़रफुर्ती सेउन्होंने सब कुछ फुर्ती से समेट दिया।
  265. स्पर्श और स्वादस्पर्श; छुअनछूने में बड़ा अच्छा लगता है।
  266. सीरीज़ पर बातचीतघटनाक्रम; विकासआगे क्या होगा, यह जानने की बेचैनी हद से ज़्यादा है।
  267. रोशनी, बिखराव और मात्रामौसममौसम खुल गया है।
  268. सीरीज़ पर बातचीतजोश; उत्साहदेखते ही जोश चढ़ जाता है।
  269. रोशनी, बिखराव और मात्राबिजली; बत्तीचलिए, बत्ती जला देते हैं।
  270. भावनाओं की ध्वनिआना (भावना); पहले से कर रखनामन भर आया।
  271. शरीर की आवाज़ेंरुकनामेरी खाँसी रुक ही नहीं रही।
  272. सीरीज़ पर बातचीतरोंगटेसच में मेरे रोंगटे खड़े हो गए।
  273. पन्ने पर ध्वनियाँदरवाज़ादरवाज़ा धड़ाम से बंद हो गया।
  274. स्पर्श और स्वादकृपया; लीजिएगरमागरम है, तब ही खा लीजिए।
  275. भावनाओं की ध्वनिधड़कता हुआमेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा है।
  276. रोशनी, बिखराव और मात्राढेर सारामुझे ढेर सारे उपहार मिले।
  277. सीरीज़ पर बातचीतकौन सा; कितनातुम अभी किस खंड तक पढ़ चुके हो?
  278. शरीर की आवाज़ेंकिस तरह का; कैसाकिस तरह का दर्द है?
  279. रोशनी, बिखराव और मात्राघटाटोप; धुँधलाआसमान भारी और धुँधला है।
  280. सीरीज़ पर बातचीतरुला देनाउनके बीच के उस रिश्ते ने मुझे रुला दिया।
  281. रूखी बोलीसुलहचलिए, सुलह कर लेते हैं।
  282. सीरीज़ पर बातचीतसाथीआखिर में साथी होना ही सबसे अच्छी बात है ना।
  283. रोशनी, बिखराव और मात्रालंबापरछाइयाँ लंबी हो गई हैं।
  284. भावनाओं की ध्वनिबह जाना; बहनायहाँ वक्त धीरे-धीरे बहता है।
  285. हँसना और रोनारोनाकृपया मत रोइए।
  286. हँसना और रोनाआँसूमेरी आँखों में आँसू आ गए।
  287. रोशनी, बिखराव और मात्राक़तार में रखना; सजानाचलिए, इन्हें सलीके से कतार में लगाते हैं।
  288. शरीर की आवाज़ेंबजनामेरा पेट गुड़गुड़ाया।
  289. आश्चर्य और हामीअच्छा; समझ गयाअच्छा, सचमुच ऐसा ही है।
  290. रूखी बोलीक्याअब क्या है?
  291. स्पर्श और स्वादगंधबड़ी अच्छी खुशबू आ रही है।
  292. सीरीज़ पर बातचीतपकड़ना; थामनाआखिर तक मेरी मुट्ठियाँ पसीने से भीगी रहीं।
  293. हरकत और नज़रभागनावे भागकर निकल गए।
  294. चेहरे के भावमुस्कुराकरवह खुलकर मुस्कुराई।
  295. रूखी बोलीफिर कभी (नहीं)यह बात फिर कभी मत कहना।
  296. हँसना और रोनानींद में बड़बड़ानाआप नींद में बड़बड़ा रहे थे।
  297. सीरीज़ पर बातचीतसामग्री; मसालाप्लीज़, कहानी मत बता देना!
  298. शरीर की आवाज़ेंनींद की कमीनींद पूरी न होने से मैं लड़खड़ा रहा हूँ।
  299. हँसना और रोनादेर तक सोनामैं देर तक सोता रह गया।
  300. शरीर की आवाज़ेंसो सकनाक्या आप अच्छी तरह सो पाए?
  301. हँसना और रोनासोनाअब मैं सोने जा रहा हूँ।
  302. रोशनी, बिखराव और मात्राबाक़ी; शेषबहुत थोड़े ही बचे हैं।
  303. आश्चर्य और हामी(शर्तें) मानना; पीनामेरी साँस थम गई।
  304. हरकत और नज़रधीरे-धीरेयातायात रेंग-रेंगकर चल रहा है।
  305. भावनाओं की ध्वनिआराम सेचलिए, इत्मीनान से रहते हैं।
  306. शरीर की आवाज़ेंहाँफ (साँस)हाँफना
  307. आश्चर्य और हामीहाँ; जीहाँ हाँ, ठीक है—टालने के अंदाज़ में
  308. रोशनी, बिखराव और मात्राघुसना; प्रवेश करनाडिब्बा ठसाठस भरा हुआ है।
  309. शरीर की आवाज़ेंआ (आछूँ)आक्छी
  310. रोशनी, बिखराव और मात्राडिब्बा; बक्साडिब्बा ठसाठस भरा हुआ है।
  311. हरकत और नज़रदौड़नावे भागकर निकल गए।
  312. आश्चर्य और हामीपहली बारमुझे यह पहली बार पता चला।
  313. हरकत और नज़रशुरू करनाचलिए, जल्दी से शुरू करते हैं।
  314. भावनाओं की ध्वनिचौंककरमैं एकाएक चौंक उठा।
  315. शरीर की आवाज़ेंनाक; गर्वमैं नाक साफ करता हूँ।
  316. किरदारों की भाषाबोलने का तरीक़ाबच्चे इसी तरह बोलते हैं।
  317. किरदारों की भाषाबोलना; बात करनाअसल के बुज़ुर्ग सामान्य ढंग से ही बोलते हैं।
  318. रूखी बोलीछोड़ देना; मुक्त करनामुझे अकेला छोड़ दे।
  319. सीरीज़ पर बातचीतजल्दी; तेज़आगे का हिस्सा जल्दी पढ़ने को बेताब हूँ!
  320. भावनाओं की ध्वनिसाँस रोके; चिंतितदेखते हुए साँस थम-सी गई।
  321. रोशनी, बिखराव और मात्राजगह; स्थानकृपया इसे उसी जगह वापस रख दीजिए।
  322. पन्ने पर ध्वनियाँधड़ामदरवाज़ा धड़ाम से बंद हो गया।
  323. हरकत और नज़रअफरा-तफरीसुबह से भागदौड़ लगी हुई है।
  324. रोशनी, बिखराव और मात्राबिखरा; बेतरतीबक्रम बिलकुल गड़बड़ है।
  325. सीरीज़ पर बातचीतखुलासाप्लीज़, कहानी मत बता देना!
  326. स्पर्श और स्वादसूखा; भुरभुराठंडा होने पर यह रूखा हो जाता है।
  327. पन्ने पर ध्वनियाँताली; चटकतालियाँ या आग की चटकन
  328. स्पर्श और स्वादब्रेड; रोटीयह ब्रेड बड़ी लचीली और चबाने में मज़ेदार है।
  329. रोशनी, बिखराव और मात्राचमकनामद्धिम-सा चमकना
  330. हँसना और रोनाबहुत दिनों बादबहुत दिनों बाद इस तरह हँसा।
  331. पन्ने पर ध्वनियाँफुसफुसाहटचलिए, कानाफूसी करना बंद करते हैं।
  332. चेहरे के भाव(भौंहें) सिकोड़नाउन्होंने भौंहें सिकोड़ लीं।
  333. चेहरे के भावचेहरे का भावचेहरे के भाव कड़े हैं।
  334. शरीर की आवाज़ेंजलन; चुनचुनाहटघाव में जलन हो रही है।
  335. भावनाओं की ध्वनिआश्चर्य; चौंकनामैं चौंक गया।
  336. पन्ने पर ध्वनियाँसनसनाती (हवा)हवा सन-सन कर चल रही है।
  337. रोशनी, बिखराव और मात्राचमचमाताफर्श चमक रहा है।
  338. पन्ने पर ध्वनियाँबहना (हवा); फूँकनाहवा सन-सन कर चल रही है।
  339. सीरीज़ पर बातचीतपूर्वसंकेत (कथा)वह पहले से बोया गया संकेत कमाल का था ना।
  340. रूखी बोलीमज़ाक करना; बकवास करनामज़ाक मत कर!
  341. किरदारों की भाषासामान्य; साधारणअसल के बुज़ुर्ग सामान्य ढंग से ही बोलते हैं।
  342. स्पर्श और स्वादकुचलना; पैर रखनाघने रोएँदार और मुलायम
  343. शरीर की आवाज़ेंचक्कर; लड़खड़ातानींद पूरी न होने से मैं लड़खड़ा रहा हूँ।
  344. हरकत और नज़रपीछे मुड़कर देखनामैंने पीछे मुड़कर देखा।
  345. स्पर्श और स्वादहिलानाघने रोएँदार और मुलायम
  346. पन्ने पर ध्वनियाँगिरना (बारिश); बरसनाबारिश झमाझम हो रही है।
  347. स्पर्श और स्वादमुलायम; रोएँदारयह कंबल बहुत मुलायम है।
  348. चीख़कर कही बातेंसकुशल; सुरक्षितअच्छा हुआ कि आप सही-सलामत हैं।
  349. रूखी बोलीसुरक्षित; ठीक-ठाकपहली मुलाकात में "watashi" कहना सुरक्षित रहता है।
  350. हरकत और नज़रटहलते हुएचलिए, यूँ ही टहलते हैं।
  351. शरीर की आवाज़ेंथका-हारामैं बिलकुल थककर चूर हो गया हूँ।
  352. रोशनी, बिखराव और मात्राकमराकमरा बिलकुल बेतरतीब है।
  353. स्पर्श और स्वादचिपचिपामेरे हाथ चिपचिपे हो रहे हैं।
  354. शरीर की आवाज़ेंबहुत भूखामुझे ज़ोर की भूख लगी है।
  355. स्पर्श और स्वादअन्य; औरभाप छोड़ता गरमागरम
  356. रोशनी, बिखराव और मात्रातारातारे जगमगा रहे हैं।
  357. भावनाओं की ध्वनिराहत की साँसचलो, राहत मिली।
  358. भावनाओं की ध्वनिखोदनामन को गरमाहट मिली।
  359. सीरीज़ पर बातचीतसाहसिक कार्यऐसे रोमांच के लिए मन तरसता है।
  360. रूखी बोलीमैं (पुरुष)मैं कर देता हूँ।
  361. भावनाओं की ध्वनिधुँधला; अनमनामैं ख्यालों में खोया हुआ था।
  362. चेहरे के भावखोया हुआमाफ कीजिए, मैं ख्यालों में खो गया था।
  363. चेहरे के भावहक्का-बक्कामुँह बाए, कुछ भी न समझते हुए
  364. रूखी बोलीख़ैर; मानोचलो, छोड़ो।
  365. चीख़कर कही बातेंसौंपना; भरोसा करनामुझ पर छोड़ दे।
  366. सीरीज़ पर बातचीतखंडतुम अभी किस खंड तक पढ़ चुके हो?
  367. चीख़कर कही बातेंहारनामैं हारूँगा नहीं।
  368. सीरीज़ पर बातचीतसच में; सीरियससच में मेरे रोंगटे खड़े हो गए।
  369. हरकत और नज़रघूरकरअविश्वास से आँखें फाड़कर देखना
  370. शरीर की आवाज़ेंमास्कमैं मास्क लगा लेता हूँ।
  371. चीख़कर कही बातेंइंतज़ार करनारुक जा!
  372. रोशनी, बिखराव और मात्राखिड़कीखिड़की खोलते ही उजाला हो जाता है।
  373. हरकत और नज़रसमय पर पहुँचनाहम समय पर पहुँच गए।
  374. रूखी बोलीनकलइसकी नकल न करना ही बेहतर है।
  375. रोशनी, बिखराव और मात्राचकाचौंधइतनी चमक है कि कुछ दिख ही नहीं रहा।
  376. चेहरे के भावभौंउन्होंने भौंहें सिकोड़ लीं।
  377. किरदारों की भाषाभटक जाना; झिझकनाअसमंजस हो तो इन्हीं का प्रयोग कीजिए।
  378. चेहरे के भावगोलउनकी आँखें फैल गईं।
  379. रोशनी, बिखराव और मात्रादिखाई देनाइतनी चमक है कि कुछ दिख ही नहीं रहा।
  380. शरीर की आवाज़ेंभद्दाआपको यह सब देखना-सुनना पड़ा, क्षमा कीजिए।
  381. चीख़कर कही बातेंरास्ता; सड़ककृपया रास्ता दीजिए।
  382. रोशनी, बिखराव और मात्राउपहार; सौग़ातमुझे ढेर सारे उपहार मिले।
  383. किरदारों की भाषापुराने ज़माने मेंयह पुराने ज़माने की भाषा है।
  384. पन्ने पर ध्वनियाँउमस भराआज बड़ी उमस है।
  385. चेहरे के भावमुँह फुलाना; भाप में पकानामुँह फुलाकर चुप बैठना
  386. चेहरे के भावचिढ़करमुझे झुँझलाहट हो गई।
  387. भावनाओं की ध्वनिछाती; सीनामेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा है।
  388. चेहरे के भावएक बार फिरमैं एक बार फिर समझाता हूँ।
  389. स्पर्श और स्वादकंबलयह कंबल बहुत मुलायम है।
  390. स्पर्श और स्वादचबाने में लचीलायह ब्रेड बड़ी लचीली और चबाने में मज़ेदार है।
  391. पन्ने पर ध्वनियाँऔर अधिककृपया थोड़ा और ज़ोर से बोलिए।
  392. रोशनी, बिखराव और मात्रामूल; पहले की स्थितिकृपया इसे उसी जगह वापस रख दीजिए।
  393. रोशनी, बिखराव और मात्रावापस करना; लौटानाकृपया इसे उसी जगह वापस रख दीजिए।
  394. चीख़कर कही बातेंलौटना; वापस जानामैं ज़रूर लौटूँगा।
  395. पन्ने पर ध्वनियाँआहट; आवाज़ज़रा-सी भी आहट नहीं है।
  396. भावनाओं की ध्वनिउलझन मेंमन में अब भी उलझन बनी हुई है।
  397. रोशनी, बिखराव और मात्रापाना; लेनामुझे ढेर सारे उपहार मिले।
  398. स्पर्श और स्वादसिकना; भुननायह अच्छी तरह सुनहरा सिक गया।
  399. स्पर्श और स्वादसब्ज़ीसब्ज़ियाँ मुरझा गई हैं।
  400. हरकत और नज़रछुट्टी; आरामछुट्टी के दिन मैं कुछ नहीं करता, बस पड़ा रहता हूँ।
  401. शरीर की आवाज़ेंआराम करना; छुट्टी लेनाथोड़ा आराम कर लें?
  402. रूखी बोलीजैसा सोचा थामुझे पता था ऐसा ही होगा।
  403. पन्ने पर ध्वनियाँरुकना; थमना (बारिश)लगता है अब थमने वाली है।
  404. पन्ने पर ध्वनियाँछोड़ना; बंद करनाचलिए, कानाफूसी करना बंद करते हैं।
  405. स्पर्श और स्वादमुलायमधोने के बाद यह मुलायम हो गया।
  406. स्पर्श और स्वादफ़र्शफर्श फिसलनभरा है।
  407. भावनाओं की ध्वनिधीरे-धीरेयहाँ वक्त धीरे-धीरे बहता है।
  408. हँसना और रोनासपनामैंने एक सपना देखा।
  409. किरदारों की भाषाअच्छाठीक है, चलो।
  410. आश्चर्य और हामीअच्छायह एक सुखद आश्चर्य था।
  411. चीख़कर कही बातेंबुलानाकृपया एम्बुलेंस बुलाइए।
  412. किरदारों की भाषाकृपया ध्यान रखेंक्या यह आपको स्वीकार्य होगा?
  413. सीरीज़ पर बातचीतलफ़ी (पात्र)आखिरकार मुझे लफी ही सबसे ज़्यादा पसंद है।
  414. सीरीज़ पर बातचीतरोमांच; सपनाइसमें वह लड़कपन के सपनों वाला रोमांस है ना।
  415. आश्चर्य और हामीसमझना; पता चलनामैं समझ सकता हूँ आप क्या कह रहे हैं।
  416. भावनाओं की ध्वनिउत्साहितकल का इंतज़ार करते हुए मन उत्साह से भरा है।
  417. रूखी बोलीबाँटना; (हरगिज़ नहीं)ऐसा हो ही नहीं सकता।
  418. किरदारों की भाषामैं (बुज़ुर्ग पुरुष)मैं ही जाऊँगा—बूढ़े की बोली में
  419. रोशनी, बिखराव और मात्राथोड़ा; मामूलीबहुत थोड़े ही बचे हैं।
  420. चेहरे के भावहँसीमैंने हँसी रोक ली।
  421. हँसना और रोनाहँसी की आवाज़हँसी की आवाज़ सुनाई दे रही है।
  422. चेहरे के भावहँसनाउसकी आँखें नहीं मुस्कुरा रहीं।