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JLPT N1 शब्द सूची ぶ-靄

584 phrases

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इन शब्दों का कान से अभ्यास करें
  1. संयोजक और शर्तेंक्षेत्रविशेषज्ञ होते हुए भी इस क्षेत्र के तेज़ बदलावों को पूरी तरह सँभाल पाना संभव नहीं।
  2. प्रकृति और जीवनप्लास्टिकअपशिष्ट प्लास्टिक को रासायनिक रूप से तोड़कर कच्चे माल के रूप में लौटाने वाली तकनीक को शीघ्र व्यावहारिक बनाना ज़रूरी है।
  3. संयोजक और शर्तेंपरियोजनाजब वह समयसीमा तक नहीं निभा पाता, तो उसे परियोजना सौंपना मुमकिन नहीं।
  4. संस्कृति और कलाहेइआन काल; शांतिहेइआन दरबार में पली-बढ़ी वह परिष्कृत संस्कृति बाद के युगों की कला पर अपार प्रभाव छोड़ गई।
  5. संस्कृति और कलाशांतिअनगिनत युद्धकालों से गुज़रने के बाद इस नगर ने आखिरकार शांति पुनः प्राप्त कर ली।
  6. उन्नत केइगो और औपचारिकतासमापन (सभा)इसी के साथ हम आज की आमसभा का समापन करते हैं।
  7. जीवन और मूल्यबेपरवाह; शांतशायद उसे "संकोच" शब्द का पता ही नहीं; पहली ही मुलाकात में वह बेधड़क निजी सवाल पूछ बैठता है।
  8. उन्नत व्यावसायिकसमानांतरबहस समानांतर पटरियों पर चलती रही, और अध्यक्ष ऐसा बीच का रास्ता तलाशते रहे जहाँ दोनों पक्ष हथियार डाल सकें।
  9. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशसामान्य समय; शांतिकालजैसा कहा जाता है, तैयारी हो तो चिंता नहीं — शांतिकाल में की गई सावधानीपूर्वक तैयारी ही आपदा के समय नुक़सान कम रखती है।
  10. ज़ोर, सीमा और चरमबेपरवाही से; शांत भाव सेप्रस्ताव की सामग्री भी ऐसी-वैसी, और जिस समिति ने उसे बेझिझक मंज़ूर कर दिया वह भी वैसी ही — बस हैरानी होती है।
  11. उन्नत केइगो और औपचारिकताआमतौर पर (औपचारिक)आप सदैव जो सद्भाव और सहयोग देते रहे हैं, उसके लिए मैं आदरपूर्वक आभार व्यक्त करता हूँ।
  12. शैक्षणिकसह-अस्तित्वजिस समाज में विविध मूल्य साथ-साथ रहते हों, वहाँ सहमति बनाने में भारी परिश्रम लगता है।
  13. वर्णन और अलंकारसाधारण; मामूलीबहस ख़ूब गरमाई, पर निष्कर्ष बिलकुल साधारण-सा ही निकला।
  14. संस्कृति और कलाशांतियुद्ध की विभीषिका को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना, शांति की कामना करने वाले हम लोगों का कर्तव्य है।
  15. उन्नत व्यावसायिकअंतर; दूरीदोनों पक्षों के रुख़ में फ़ासला है, पर कहीं न कहीं व्यावहारिक बीच का रास्ता तलाशने के सिवा चारा नहीं।
  16. समाज और सामयिक विषयअलग करना; भेद करनाविकलांगता हो या न हो, हर कोई बिना भेदभाव जी सके — ऐसा समाज ही हमारा लक्ष्य होना चाहिए।
  17. वर्णन और अलंकारखुशामद करनाजो सत्ता के आगे चापलूसी करता है, उसे सच्चे न्याय की बात करने का क्या हक़?
  18. वर्णन और अलंकारकमराकाग़ज़ी परदों से छनकर आती रोशनी कमरे को हल्के से रोशन कर रही थी और चटाई की बुनावट उभार रही थी।
  19. समाज और सामयिक विषयघटना; कम होनाग्रामीण इलाकों का उजड़ना केवल आबादी घटने की बात नहीं; इसका अर्थ स्थानीय संस्कृति का ही लोप हो सकता है।
  20. मूल्यांकन और अनिवार्यतागुज़रना; बीतनाआधी सदी बाद भी यह पढ़ने लायक इसलिए है, क्योंकि यह सचमुच सार्वभौमिक विषय को छूती है।
  21. संयोजक और शर्तेंपरिवर्तनविशेषज्ञ होते हुए भी इस क्षेत्र के तेज़ बदलावों को पूरी तरह सँभाल पाना संभव नहीं।
  22. क़ानून और संस्थाएँवापसी; लौटानाअगर अनुदान के उद्देश्य से हटकर किया गया खर्च सामने आया, तो राशि लौटाने की माँग की जा सकती है।
  23. क़ानून और संस्थाएँधनवापसीख़राब वस्तु के लिए उपभोक्ता को धन-वापसी माँगने का अधिकार है।
  24. उन्नत केइगो और औपचारिकतापरिवर्तन; बदलावअपनी सुविधा की बात कहने के लिए क्षमा चाहता हूँ, पर यदि आप स्थल बदलने पर विचार करें तो कृपा होगी।
  25. शैक्षणिकसंपादनजीन-संपादन तकनीक एक ओर अपार लाभ लाती है, दूसरी ओर उसमें गंभीर नैतिक समस्याएँ छिपी हैं।
  26. मनोविज्ञान और सूक्ष्म भावजवाब; उत्तरबॉस का जवाब न हाँ था न ना — उसकी भाषा में जान-बूझकर कुछ अनकहा छोड़ दिया गया था।
  27. तर्क और वाद-विवादचरहो सकता है कोई तीसरा कारक ही दोनों चरों को एक साथ ऊपर धकेल रहा हो, और उनमें सीधा कारण-संबंध हो ही नहीं।
  28. संस्कृति और कलापरिवर्तन; उतार-चढ़ावअनगिनत बदलावों से गुज़रकर भी इस इलाक़े की बोली आज तक अपना विशिष्ट उतार-चढ़ाव बनाए हुए है।
  29. उन्नत व्यावसायिकउत्तर; जवाब"हम इसे सकारात्मक ढंग से देखेंगे" — इस जवाब का मतलब हमेशा स्वीकृति नहीं होता, इसलिए सावधानी चाहिए।
  30. समाज और सामयिक विषयचावलअमेरिकी सैन्य अड्डे के स्थानांतरण को लेकर स्थानीय निवासियों और सरकार के बीच टकराव और गहराता जा रहा है।
  31. संस्कृति और कलाअलगबड़े-छोटे का भेद किए बिना सबके साथ शिष्टता से पेश आने के उसके रवैये ने अपने आप लोगों का भरोसा जीत लिया।
  32. संस्कृति और कलाबिछोह"सायोनारा" शब्द की उत्पत्ति पर कई मत हैं, पर हर एक में बिछड़ने का भाव घुला हुआ है।
  33. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशअनुभवी व्यक्तिजो बातचीत में आसानी से क़ाबू न आए, ऐसे प्रतिपक्ष से अनुभवी राजनयिक तक परेशान हो गया।
  34. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशपढ़ाई; अध्ययनसफ़र के दौरान भाषा का पॉडकास्ट सुनो तो वक़्त भी कट जाता है और पढ़ाई भी हो जाती है — एक पंथ दो काज।
  35. संयोजक और शर्तेंबचाव; पैरवीचाहे सारी दुनिया को दुश्मन बना लेना पड़े, मैं आख़िर तक उसका बचाव करता रहूँगा।
  36. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशवकीलइतना सावधान वकील तारीख़ भूल जाए — यह देखकर मुझे अजीब-सी हैरानी हुई; सचमुच बड़े-बड़ों से भी चूक हो जाती है।
  37. ज़ोर, सीमा और चरमसफ़ाई; स्पष्टीकरणसफ़ाई देने की कोई गुंजाइश नहीं; अब सिर्फ़ माफ़ी माँगना ही बाकी है।
  38. तर्क और वाद-विवादतर्क; बहसउसकी दलील सुनने में सही-सी लगती है, पर तह तक जाएँ तो वह एक चतुर कुतर्क है।
  39. प्रकृति और जीवनगति; रफ़्तारनवीकरणीय संसाधन भी यदि उपभोग की गति पुनर्जनन की गति से आगे निकल जाए तो समाप्त होने से नहीं बच सकता।
  40. समाज और सामयिक विषयबाल देखभालशिशु-गृह की प्रतीक्षा-सूची ख़त्म करने का ऐलान तब तक खोखला है, जब तक शिशु-शिक्षकों की स्थिति नहीं सुधरती।
  41. ज़ोर, सीमा और चरमक़ानूनचाहे मंत्री हो या आम नागरिक, क़ानून के सामने सबके साथ बराबर बर्ताव होना चाहिए।
  42. संस्कृति और कलाबोलीअनगिनत बदलावों से गुज़रकर भी इस इलाक़े की बोली आज तक अपना विशिष्ट उतार-चढ़ाव बनाए हुए है।
  43. तर्क और वाद-विवाददिशापूरी सहमति मैं फ़िलहाल रोक रखता हूँ, पर दिशा को लेकर मुझे कोई आपत्ति नहीं।
  44. संयोजक और शर्तेंरिपोर्टइस रिपोर्ट में नतीजों पर जल्दी पहुँचने की प्रवृत्ति है, और उसके तर्क भी कमज़ोर हैं।
  45. शैक्षणिकपद्धति; प्रणालीअगर क्वांटम एन्क्रिप्शन आम हो गया, तो मौजूदा एन्क्रिप्शन तरीक़े जड़ से पलट सकते हैं।
  46. मनोविज्ञान और सूक्ष्म भावपारिश्रमिकइस उद्योग में यह अलिखित समझ है कि पहली मुलाक़ात में पैसे की बात नहीं छेड़ी जाती।
  47. संयोजक और शर्तेंनीति; दिशाचाहे कितनी ही आलोचना झेलनी पड़ी हो, उसने अपनी शोध-दिशा कभी नहीं बदली।
  48. प्रकृति और जीवनप्रसारणऊँची जगह पर जाने का आग्रह करती घोषणाएँ बार-बार हुईं, फिर भी कम निवासी नहीं थे जिन्होंने उन्हें अनसुना कर दिया।
  49. उन्नत व्यावसायिकउपेक्षा; यूँ ही छोड़नाव्यवस्था की खामी को छोड़कर केवल ज़िम्मेदार कर्मचारी को सज़ा देने से मूल सुधार नहीं होता।
  50. तर्क और वाद-विवादविधि का शासनअगर क़ानून सत्ताधारियों की मनमर्ज़ी से मुड़ने लगे, तो क़ानून के राज का नाम ही लजा जाता है।
  51. वर्णन और अलंकारकानूनीइस मामले में हमारी कंपनी की कोई भी क़ानूनी ज़िम्मेदारी नहीं बनती।
  52. मूल्यांकन और अनिवार्यतासमाचार; रिपोर्टजो ख़ुद को पत्रकार कहता है, उसे सत्ता पर निगरानी रखने का अपना कर्तव्य एक पल के लिए भी नहीं भूलना चाहिए।
  53. उन्नत केइगो और औपचारिकताआपका शुभ नामक्षमा कीजिए, क्या आप कृपया इस अतिथि-पुस्तिका में अपना नाम लिख देंगे?
  54. क़ानून और संस्थाएँकानून और नियमक़ानून और नियमों का पालन करके ही कोई कंपनी समाज का भरोसा जीत सकती है।
  55. ज़ोर, सीमा और चरमअन्य; औरइतनी बड़ी ज़िम्मेदारी तुम्हारे अलावा और किसी को सौंपी ही नहीं जा सकती।
  56. ज़ोर, सीमा और चरमऔर कुछ नहीं होनाउसकी ख़ामोशी और कुछ नहीं, मौन सहमति ही थी।
  57. प्रकृति और जीवनसुदृढ़ीकरणवास्तविकता यह है कि जर्जर लकड़ी के मकानों को भूकंपरोधी बनाने में बड़ी रकम और लंबा समय लगता है।
  58. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशबीमाकुछ लोग बीमा को फ़िज़ूल समझते हैं, पर तैयारी हो तो चिंता नहीं — उसका असली मोल आपदा के वक़्त ही पता चलता है।
  59. उन्नत व्यावसायिकभालाबहस समानांतर पटरियों पर चलती रही, और अध्यक्ष ऐसा बीच का रास्ता तलाशते रहे जहाँ दोनों पक्ष हथियार डाल सकें।
  60. संस्कृति और कलाधूलहमारे घर में साल के आख़िरी दिन पूरे बरस की धूल झाड़ना पुरानी परंपरा है।
  61. जीवन और मूल्यगर्वमेरा मानना है कि गुमनाम काम पर गर्व कर पाना ही किसी व्यक्ति का असली कद तय करता है।
  62. समाज और सामयिक विषयसंरक्षण; अभिभावकत्वनियमों में हद से ज़्यादा ढील कभी-कभी उपभोक्ता संरक्षण की दृष्टि से समस्याएँ पैदा कर सकती है।
  63. भाषा और मीडियागारंटी; ज़मानतइसकी कोई गारंटी कहीं नहीं है कि गुमनाम सद्भावना सद्भावना बनी रहकर ही फैलेगी।
  64. समाज और सामयिक विषयसुरक्षा; गारंटीबढ़ता सामाजिक सुरक्षा खर्च देश के राजकोष पर भारी दबाव डाल रहा है।
  65. उन्नत व्यावसायिकक्षतिपूर्ति; कवरेजदूसरे पक्ष के वकील के साथ हमने मुआवज़े के दायरे की शर्तें बारीकी से तय कीं।
  66. क़ानून और संस्थाएँसब्सिडी; सहायताकोई परियोजना अनुदान की पात्र है या नहीं, यह उसकी सार्वजनिक उपयोगिता की कड़ी जाँच के बाद ही तय होता है।
  67. प्रकृति और जीवनसंरक्षणबहुमूल्य आर्द्रभूमि को बचाने के लिए प्रशासन और स्थानीय निवासी वर्षों तक धैर्यपूर्वक बातचीत करते रहे हैं।
  68. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशपूरी तरह; बुरी तरह (तंग)विद्रोही उम्र के बेटे से माता-पिता बुरी तरह परेशान लगते हैं।
  69. भाषा और मीडियालगभगउनके तर्क की धारा शुरू से आखिर तक एक-सी है और खंडन की गुंजाइश लगभग नहीं छोड़ती।
  70. प्रकृति और जीवनलागू करना; प्रदान करनाजीवन-रक्षक उपाय कहाँ तक जारी रखे जाएँ, यह प्रश्न परिवार पर एक भारी निर्णय थोप देता है।
  71. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशहड्डी; मेहनतइतने विशाल दस्तावेज़ों को एक-एक करके जाँचना सचमुच कमरतोड़ काम है।
  72. वर्णन और अलंकारलौ; ज्वालामोमबत्ती की लौ जब-जब काँपती, दीवार पर पड़ती मानव-छाया गहरी होकर फिर मद्धिम पड़ जाती।
  73. वर्णन और अलंकारहल्का; मंदकाग़ज़ी परदों से छनकर आती रोशनी कमरे को हल्के से रोशन कर रही थी और चटाई की बुनावट उभार रही थी।
  74. जीवन और मूल्यकिताबकौन सोचता था कि एक ही किताब से मुलाकात मेरे जीने के ढंग को बदलने वाला मोड़ बन जाएगी।
  75. संयोजक और शर्तेंपूर्ण रूप से; असलीबजट भी मंज़ूर हो गया है, तो अब हम सचमुच पूरी तरह योजना आगे बढ़ा सकते हैं।
  76. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशमुख्य व्यवसायकारोबार में विविधता के नाम पर हाथ ज़्यादा फैलाओगे, तो दो नावों वाली हालत हो जाएगी और मुख्य धंधे की रीढ़ तक हिल सकती है।
  77. उन्नत केइगो और औपचारिकतायह मामलाइस विषय में संबंधित विभाग से पुष्टि करके मैं बाद में आपको उत्तर दूँगा।
  78. शैक्षणिकयह शोध-पत्रइस लेख में हम वास्तविक आँकड़ों की मदद से प्रस्तावित विधि की वैधता की जाँच करते हैं।
  79. उन्नत व्यावसायिकसार; मूल स्वरूपकिनारे के मुद्दों पर वक़्त लगाने के बजाय पहले असली बिंदुओं को सुलझाना ज़रूरी है।
  80. मनोविज्ञान और सूक्ष्म भावअसली मन; सच्ची भावनाकिसी से भी अपने मन की बात न कह पाने के कारण वह एक लाचार अकेलापन ढोता रहा।
  81. ज़ोर, सीमा और चरमआज (औपचारिक)आज की बैठक के साथ ही इस समिति को भंग किया जाता है।
  82. संयोजक और शर्तेंस्वयं; ख़ुद वह व्यक्तिसंबंधित व्यक्ति संतुष्ट हो या न हो, हस्ताक्षरित अनुबंध की वैधता पर कोई फ़र्क नहीं पड़ता।
  83. संयोजक और शर्तेंअसली मन की बातमन ही मन झिझकते हुए भी उसने हिम्मत करके बैठक में अपने दिल की बात कह डाली।
  84. भाषा और मीडियामात्रयुवाओं की भाषा की शब्द-गढ़ने की ताकत चौंकाने वाली है, फिर भी उनमें से मुट्ठी भर ही टिक पाते हैं।
  85. उन्नत व्यावसायिकमुख्यालयमैदान से हम यह प्रस्ताव पास कराना चाहते हैं, पर असली कुंजी यह है कि हस्ताक्षर का अधिकार रखने वाले महाप्रबंधक को कैसे राज़ी करें।
  86. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशउल्टी प्राथमिकताजिस टूल को दक्षता बढ़ाने के लिए लाया गया, उसी के रखरखाव में सारा समय चला जाए — इसे उलटी गंगा बहाना ही कहना पड़ेगा।
  87. मूल्यांकन और अनिवार्यताअसली नामन उसका संपर्क पता है, न असली नाम — इसलिए धन्यवाद कहने का कोई रास्ता ही नहीं।
  88. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशअनुवादतकनीकी शब्दावली से भरे अनुबंध का अनुवाद करना कमरतोड़ काम था।
  89. उन्नत केइगो और औपचारिकतामूलतः"ओ-मेशिआगारि-नि-नारु" दरअसल दोहरा आदरसूचक रूप है, फिर भी प्रचलन में इसे व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है।
  90. तर्क और वाद-विवादमुख्य विषयबाल की खाल निकालने वाली नुक्ताचीनी में उलझकर असली बहस शुरू होने से पहले ही समय ख़त्म हो गया।
  91. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशअपशब्द; कटु वचनएक बार जो कड़वे बोल निकल गए, वे बिखरे पानी की तरह हैं — कितनी भी माफ़ी माँगो, खोया भरोसा लौटता नहीं।
  92. समाज और सामयिक विषयआपदा रोकथामइस आपदा ने स्थानीय निकायों की आपदा-तैयारी की कमज़ोरी को उजागर कर दिया।
  93. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशविशालइतने विशाल दस्तावेज़ों को एक-एक करके जाँचना सचमुच कमरतोड़ काम है।
  94. समाज और सामयिक विषयविस्तार; बढ़ोतरीसामाजिक सुरक्षा खर्च का बढ़ना हमारे सामने पीढ़ियों के बीच निष्पक्षता का कठिन सवाल खड़ा कर रहा है।
  95. भाषा और मीडियाशुरुआतशुरुआत में ही सार स्पष्ट रूप से बता दिया जाए, तो पाठक निश्चिंत होकर आगे पढ़ता चला जाता है।
  96. संयोजक और शर्तेंमातृभूमिअपने वतन से दूर रहने वाला होने के कारण, उसके मन में घर की याद औरों से कहीं ज़्यादा गहरी है।
  97. संस्कृति और कलाकब्र के सामनेबॉन के अवसर पर क़ब्र के आगे दिवंगत की पसंदीदा चीज़ें चढ़ाना पुरानी परंपरा है।
  98. भाषा और मीडियाधुँधला होनासब कुछ समझा देने की कोशिश में लेख उल्टे लंबा हो गया और मुद्दा ही धुँधला पड़ गया।
  99. प्रकृति और जीवनस्वयंसेवकआपदाग्रस्त क्षेत्र की बहाली जैसे-जैसे लंबी खिंचती गई, स्वयंसेवकों की संख्या साफ़ दिखने लायक घटती चली गई।
  100. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशथाली; (बोन) उत्सवएक बार जो कड़वे बोल निकल गए, वे बिखरे पानी की तरह हैं — कितनी भी माफ़ी माँगो, खोया भरोसा लौटता नहीं।
  101. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशपॉडकास्टसफ़र के दौरान भाषा का पॉडकास्ट सुनो तो वक़्त भी कट जाता है और पढ़ाई भी हो जाती है — एक पंथ दो काज।
  102. ज़ोर, सीमा और चरमबीच; अंतरालउस एक घटना के बाद से दोनों के बीच एक बारीक-सी दरार पैदा हो गई है।
  103. मनोविज्ञान और सूक्ष्म भावख़ैर; मानोविभागाध्यक्ष का यह कहना — "चलो, आगे देखेंगे" — साफ़ तौर पर कोई अनकही बात छिपाए था।
  104. वर्णन और अलंकारहर सुबहउम्र ज़्यादा होने के बावजूद मेरे दादा बेहद स्वस्थ हैं और आज भी सुबह की सैर नहीं छोड़ते।
  105. वर्णन और अलंकारमाइक्रोफ़ोनपत्रकारों ने माइक इस तरह आगे बढ़ाए मानो एक भी शब्द छूटने न देने की ठान ली हो।
  106. संयोजक और शर्तेंहर दिन; रोज़रोज़ न सही, पर हफ़्ते में एक बार मैं ज़रूर मौके पर खुद जाने का ध्यान रखता हूँ।
  107. समाज और सामयिक विषयअल्पसंख्यकयौन अल्पसंख्यकों को लेकर समझ भले ही बढ़ी हो, क़ानूनी ढाँचा अब भी बेहद धीमी रफ़्तार से आगे बढ़ रहा है।
  108. वर्णन और अलंकारनाचना; लहरानापूरी तरह खिले चेरी-फूलों का हवा में बिखरना ऐसा लगता था मानो आसमान से हल्की बर्फ़ बरस रही हो।
  109. भाषा और मीडियाभूमिकाभूमिका लंबी हो जाए, तो पाठक असली बात तक पहुँचने से पहले ही छोड़कर चला जाता है।
  110. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशसकारात्मकबीते दिनों की कड़वाहट भुलाकर आगे से हम सकारात्मक ढंग से मिलकर काम करें।
  111. मूल्यांकन और अनिवार्यतासौंपनाजब उसे चुनौती भरा, दिलचस्प काम सौंपा गया, तो वह पानी में लौटी मछली जैसा हो गया।
  112. संयोजक और शर्तेंसौंपना; भरोसा करनाजब वह समयसीमा तक नहीं निभा पाता, तो उसे परियोजना सौंपना मुमकिन नहीं।
  113. वर्णन और अलंकारचलते रहना; खुलेआम होनाजिस समाज में ऐसा अन्याय बेरोक-टोक चलता हो, उसे भला कौन न्यायपूर्ण कह सकेगा?
  114. संस्कृति और कलाभ्रम; (नि)स्संदेहविद्या की परंपरा में वे निस्संदेह उस विचारधारा के वैध उत्तराधिकारी हैं।
  115. ज़ोर, सीमा और चरमपर्दा; अंकइकतीस मार्च को हमारी दुकान अपने लंबे इतिहास पर पर्दा गिरा देगी।
  116. शैक्षणिकऋणात्मक; नकारात्मकप्रतिगमन विश्लेषण से आयु और संतुष्टि के बीच सार्थक ऋणात्मक सहसंबंध पाया गया।
  117. मनोविज्ञान और सूक्ष्म भावमोड़ना; (सिद्धांत) झुकानामेरे पिता हठी स्वभाव के थे और एक बार जो सिद्धांत ठान लिया, उसे कभी नहीं छोड़ा।
  118. उन्नत केइगो और औपचारिकतासचमुच; हार्दिक रूप सेमुझे अत्यंत संकोच है, पर क्या आप समयसीमा दो-तीन दिन बढ़ा सकेंगे?
  119. उन्नत केइगो और औपचारिकतासही ढंग से"ओ-योमि-नि-नारारेरु" को ग़लत माना जाता है; सही रूप "ओ-योमि-नि-नारु" है।
  120. समाज और सामयिक विषयघर्षण; टकरावविविधता और कुछ नहीं, वह अवधारणा है जिसमें भिन्न मूल्यों के टकराव को झेलने का साहस भी शामिल है।
  121. ज़ोर, सीमा और चरमबिल्कुल; सचमुचवह हवेली, जिस पर पैसा पानी की तरह बहाया गया था, विलासिता की पराकाष्ठा थी।
  122. मनोविज्ञान और सूक्ष्म भावमिलना; घुलना-मिलनाबूढ़े माता-पिता को देखभाल-केंद्र में रखने का दुख और अपराधबोध आज भी मेरे मन में घुला-मिला रहता है।
  123. मनोविज्ञान और सूक्ष्म भावबढ़नाबुढ़ापे में उसकी ज़िद और बढ़ती जा रही है, और परिवार आधा हार मानकर उसे देखता रहता है।
  124. उन्नत केइगो और औपचारिकताऔर अधिकअंत में, मैं हृदय से आप सबकी उत्तरोत्तर समृद्धि की कामना करता हूँ।
  125. ज़ोर, सीमा और चरमसबसे पहलेयूँ हिचकिचाते मत रहो — फ़ोन करो या मेल भेजो, पहले उसी से पूछ लो।
  126. भाषा और मीडियामिलानासाहित्यिक और बोलचाल की भाषा को कुशलता से गूँथने वाली उस लेखनी में उस लेखक की अपनी विशिष्ट गरिमा झलकती है।
  127. क़ानून और संस्थाएँफैला होना; व्याप्त होनामामला कई मंत्रालयों से जुड़ा था, इसलिए वे अधिकार-क्षेत्र एक-दूसरे पर टालते रहे और कार्रवाई पिछड़ गई।
  128. संयोजक और शर्तेंशहर; नगरदस साल बाद मिली जीत थी, इसलिए पूरा शहर जश्न में डूब गया।
  129. संयोजक और शर्तेंप्रतीक्षा में होना; इंतज़ार करनाआगे चाहे कैसी भी मुश्किलें खड़ी हों, हम इस योजना को अधूरा नहीं छोड़ सकते।
  130. संस्कृति और कलानगर दृश्यजालीदार दरवाज़ों के पीछे जलती रोशनी वाली उस पुरानी गली में बीते दिनों की छटा आज भी बची है।
  131. मूल्यांकन और अनिवार्यतापारंपरिक नगर-गृहमरम्मत की मेहनत रंग लाई — वह पुराना मकान पहचान में न आने की हद तक रहने लायक हो गया।
  132. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशनिकट; आसन्नसमयसीमा सिर पर है और वह फिर से पैंट्री में गप्पें हाँक रहा है।
  133. समाज और सामयिक विषयआमने-सामनेनई संधि की व्याख्या को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष की राय आमने-सामने टकरा रही है।
  134. तर्क और वाद-विवादपूरी तरह; बिल्कुलवही घटना, देखने का धरातल बदल दें तो, बिलकुल अलग अर्थ धारण कर लेती है।
  135. भाषा और मीडियाबिल्कुलमैंने सोचा था कि मैंने घुमा-फिराकर मना कर दिया, पर सामने वाले तक बात पहुँची ही नहीं और उल्टे गलतफहमी हो गई।
  136. उन्नत केइगो और औपचारिकतापूर्ण करना (कर्तव्य)मेरी सामर्थ्य भले ही सीमित हो, मैं अपनी पूरी शक्ति लगाकर अपने दायित्व निभाने का संकल्प रखता हूँ।
  137. उन्नत केइगो और औपचारिकतापत्र के अंतिम शब्दअंत में, मैं हृदय से आप सबकी उत्तरोत्तर समृद्धि की कामना करता हूँ।
  138. ज़ोर, सीमा और चरमइंतज़ार करनातैयारी पूरी तरह मुकम्मल है। अब बस नतीजे का इंतज़ार करना बाकी है।
  139. उन्नत केइगो और औपचारिकताअंतिम दिन (महीने का)हमें खेद है कि अपनी सुविधा से यह निर्णय ले रहे हैं, पर आगामी मार्च के अंत में हम दुकान बंद कर देंगे।
  140. वर्णन और अलंकारत्योहार; उत्सवत्योहार की बची हुई गूँज की तरह, फुलझड़ी का धुआँ रात की हवा में लहराकर मिट गया।
  141. तर्क और वाद-विवादनिशाना; लक्ष्यवह प्रतिवाद निशाने पर लगा हो, ऐसा कहना कठिन है; लगता है असली मुद्दा ही ग़लत समझा गया है।
  142. संस्कृति और कलापहनना; ओढ़नाबारह परतों वाला किमोनो पहने वह आकृति इतनी सुरुचिपूर्ण थी मानो किसी चित्र-पट से निकल आई हो।
  143. संयोजक और शर्तेंसंक्षेप करना; इकट्ठा करनाअनुभव भले ही कम रहा हो, फिर भी उसने उस मुश्किल मामले को डटकर अंजाम तक पहुँचाया।
  144. वर्णन और अलंकारखिड़कीखिड़की के शीशे पर हल्की भाप जम गई थी, जिससे बाहर का दृश्य नरमी से धुँधला रहा था।
  145. क़ानून और संस्थाएँकाउंटर; खिड़कीयह मामला हमारे मंत्रालय के अधिकार-क्षेत्र से बाहर है; कृपया उचित कार्यालय से संपर्क करें।
  146. वर्णन और अलंकारखिड़की के पासपतझड़ की हवा ने खिड़की पर हल्के से दस्तक दी, मानो सर्दी के आने की ख़बर दे रही हो।
  147. तर्क और वाद-विवादगुमराह करनाउसकी बातों की चतुराई में बहने के बजाय हमें ठंडे दिमाग़ से उसके दावे का सार परखना चाहिए।
  148. मनोविज्ञान और सूक्ष्म भावदृष्टि; निगाहवृद्ध गुरु सांसारिक उत्थान-पतन से ऊपर उठी दृष्टि से चुपचाप अपने युग को निहारते रहे।
  149. जीवन और मूल्यसीख; अध्ययनसेवानिवृत्ति को मैंने एक मोड़ के रूप में लिया और कुछ नया सीखना शुरू करने का निश्चय किया।
  150. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशसीखनाइतिहास से सीखने की दृष्टि के बिना सच्चे अर्थों में कोई सुधार संभव ही नहीं है।
  151. संयोजक और शर्तेंबचना; मुक्त होनाइसे जवानी की भूल कहकर बात ख़त्म की जा सकती है, फिर भी ज़िम्मेदारी से वह बच नहीं सकता।
  152. जीवन और मूल्यहरकतजिसने उपकार किया, उसके प्रति कर्तव्य से चूकना—बस यही एक काम मैं चाहे कुछ भी हो जाए, नहीं करना चाहता।
  153. मूल्यांकन और अनिवार्यतानकलउपकार का बदला अपकार से देना — इसे इंसान के लायक न होने वाला कृत्य ही कहना पड़ेगा।
  154. मनोविज्ञान और सूक्ष्म भावआमंत्रित करना; पैदा करनाअपनी प्रतिभा पर हद से ज़्यादा भरोसे का घमंड ही उसके पतन का कारण बना — इससे इनकार नहीं किया जा सकता।
  155. ज़ोर, सीमा और चरम(पल भर की) फ़ुरसत नहीं; शीघ्रजब से मैंने अपना काम शुरू किया है, दिन-रात बिना रुके काम ही काम चल रहा है।
  156. जीवन और मूल्यअंत तक रक्षा करनातीन पीढ़ियों से चली आ रही इस दुकान को बचाए रखना ही मेरे पिता का सबसे बड़ा गर्व था।
  157. मूल्यांकन और अनिवार्यतापालन करना; रक्षा करनाजिसका काम प्रेस की आज़ादी की रक्षा करना है, वही तथ्यों को तोड़-मरोड़े — यह किसी लेखनी के व्यक्ति के लिए अशोभनीय विश्वासघात है।
  158. संयोजक और शर्तेंनिभा सकना; बचा सकनाजब वह समयसीमा तक नहीं निभा पाता, तो उसे परियोजना सौंपना मुमकिन नहीं।
  159. जीवन और मूल्यदुविधालौटने का रास्ता काटकर अपना काम शुरू करने की ठान चुकी उसकी आँखों में अब कोई दुविधा नहीं थी।
  160. ज़ोर, सीमा और चरमभटक जाना; झिझकनायूँ हिचकिचाते मत रहो — फ़ोन करो या मेल भेजो, पहले उसी से पूछ लो।
  161. वर्णन और अलंकारपूरी तरह; बिल्कुलसब तकनीकी शब्दावली थी, और मुझ जैसे आम आदमी को कुछ भी समझ नहीं आया।
  162. ज़ोर, सीमा और चरममानोउस कंपनी में प्रबंधन भी लापरवाह है और कर्मचारी भी — कहीं ज़रा भी संकट का एहसास नहीं दिखता।
  163. ज़ोर, सीमा और चरमदुर्लभउसकी असाधारण प्रतिभा के बावजूद भी वह कठिन समस्या हल नहीं हो सकी।
  164. उन्नत व्यावसायिकघुमाना; प्रसारित करनास्वीकृति-पत्र पहले ही परिचालन में भेज दिया गया है, पर निदेशकों की मंज़ूरी आने में कुछ दिन लगेंगे।
  165. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशघूमना; बारी आनाकहते हैं जल्दी का काम शैतान का — बुनियाद छोड़कर सीधे ऊँचे स्तर पर कूदने की क़ीमत बाद में ज़रूर चुकानी पड़ती है।
  166. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशघूमकर जा सकनाजब समयसीमा सिर पर हो, तभी "जल्दी का काम शैतान का" मानकर एक-एक चरण जाँचना आख़िर में तेज़ पड़ता है।
  167. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशआपात स्थिति में; कहींकुछ लोग बीमा को फ़िज़ूल समझते हैं, पर तैयारी हो तो चिंता नहीं — उसका असली मोल आपदा के वक़्त ही पता चलता है।
  168. संयोजक और शर्तेंखचाखच भरामशहूर लेखक का व्याख्यान था, इसलिए सभागार खचाखच भर गया।
  169. वर्णन और अलंकारपूर्ण प्रस्फुटन; पूरी तरह खिलापूरी तरह खिले चेरी-फूलों का हवा में बिखरना ऐसा लगता था मानो आसमान से हल्की बर्फ़ बरस रही हो।
  170. मनोविज्ञान और सूक्ष्म भावसभी उपस्थित लोगसबके सामने डाँट पड़ी, और मैं सिर झुकाए ऐसे बैठा रहा मानो वहाँ टिकना ही मुश्किल हो।
  171. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशअहंकार; आत्मतुष्टिउसकी ज़ुबान फिसलने पर दोष देने से पहले यह याद रखना चाहिए कि बड़े-बड़ों से चूक हो जाती है, और अपने घमंड पर लगाम लगानी चाहिए।
  172. समाज और सामयिक विषयदीर्घकालिक; जीर्णइस महामारी ने चिकित्सा-मोर्चे पर कर्मचारियों की पुरानी कमी को फिर से उजागर कर दिया।
  173. शैक्षणिकसंतोषप्रतिगमन विश्लेषण से आयु और संतुष्टि के बीच सार्थक ऋणात्मक सहसंबंध पाया गया।
  174. वर्णन और अलंकारफल; परिणामबरसों की मेहनत आख़िर रंग लाई, और पुरस्कार मिलने की भावना और भी गहरी है।
  175. उन्नत केइगो और औपचारिकताशरीर; स्वयंमुझ जैसे अनुभवहीन को इतना बड़ा दायित्व सौंपा गया — यह मेरे लिए अत्यंत संकोच की बात है।
  176. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशहिलना-डुलनादोनों पक्षों की दलीलों के बीच फँसकर मध्यस्थ हिल तक नहीं पा रहा था।
  177. मूल्यांकन और अनिवार्यतानज़र से ओझल होना; खो देनाजिस बुढ़ापे में जीने का मक़सद ही खो जाए, उससे ज़्यादा अकेला कुछ नहीं।
  178. उन्नत केइगो और औपचारिकताआगमन (आदरसूचक)अध्यक्ष महोदय कुछ देर पहले ही स्थल पर पधारे हैं।
  179. जीवन और मूल्यदिखावामैं दिखावा किए बिना, अपनी हैसियत के मुताबिक जीवन जीने का ध्यान रखता हूँ।
  180. मूल्यांकन और अनिवार्यतादिखाई देनाशायद मेरी खरी-खरी बातों का असर हुआ — उसके काम में साफ़ नज़र आने वाला सुधार आया।
  181. उन्नत व्यावसायिकअनदेखा कर देनायह पहलू मुझसे छूट गया था। लगता है इस पर चर्चा थोड़ी और गहरी करने लायक है, है ना?
  182. उन्नत व्यावसायिकअनसुलझाजब तक तकनीकी समस्याएँ हल नहीं होतीं, इस मुद्दे को फ़िलहाल ठंडे बस्ते में डालने के सिवा चारा नहीं।
  183. प्रकृति और जीवनतना; (स्टेम)मूल कोशिका अनुसंधान की प्रगति पुनर्योजी चिकित्सा के लिए नए क्षितिज खोल रही है।
  184. मूल्यांकन और अनिवार्यतापरखना; पहचाननाकोई भरोसे के लायक है या नहीं, यह संकट के वक़्त ही सबसे साफ़ पता चलता है।
  185. मनोविज्ञान और सूक्ष्म भावहेय दृष्टि से देखनाउस समीक्षक के बोलने के अंदाज़ से दूसरों को हेय समझने वाला घमंड टपकता है।
  186. प्रकृति और जीवनसंभावना; अनुमानजब ठीक होने की कोई संभावना ही नहीं बची, तो जीवन लंबा करने से अधिक पीड़ा कम करने को प्राथमिकता देनी चाहिए।
  187. मूल्यांकन और अनिवार्यताशानदार; उत्कृष्टइतनी शानदार पूर्णता के आगे 'अद्भुत' के सिवा और कोई शब्द सूझता ही नहीं।
  188. भाषा और मीडियाछोटा; संक्षिप्तछोटे निबंध में भी चारों चरण सुव्यवस्थित हों, तो पढ़ने के बाद का प्रभाव कहीं अधिक कसा हुआ लगता है।
  189. संयोजक और शर्तेंग़लती; चूकतुम कोई नौसिखिए तो हो नहीं, इस स्तर की ग़लती माफ़ नहीं की जा सकती।
  190. भाषा और मीडियासीधे देखना; सामना करनासूचना-क्रांति के उजाले और अँधेरे को शांत मन से देखकर ही हम तकनीक के हाथों नचाए जाने से बच सकते हैं।
  191. संयोजक और शर्तेंअनदेखा करना; जाने देनाइतनी अच्छी शर्तें सामने हों, तो दूसरी कंपनियाँ चुपचाप देखती रहें, यह हो ही नहीं सकता।
  192. संयोजक और शर्तेंस्वयं; खुदजब अध्यक्ष खुद मोर्चा संभाल रहे हों, तो कर्मचारियों को भी कमर कसनी ही पड़ेगी।
  193. समाज और सामयिक विषयसीमा (नियंत्रण); जल-तटसंक्रमण के दोबारा फैलने की आशंका के बीच सरकार ने सीमा-नियंत्रण कड़े करने शुरू कर दिए।
  194. मनोविज्ञान और सूक्ष्म भावदुकानजिस दुकान में मैं बरसों से जाता रहा, वह बंद होने वाली है — यह सुनकर मन में एक अजीब-सी उदासी भर आई।
  195. क़ानून और संस्थाएँनाबालिगनाबालिग द्वारा अकेले किया गया अनुबंध बाद में रद्द किया जा सकता है।
  196. मनोविज्ञान और सूक्ष्म भावदिखानाशायद यह भाँपकर कि विरोध होगा, उसने अपना प्रस्ताव रखने का ज़रा-सा भी संकेत नहीं दिया।
  197. ज़ोर, सीमा और चरमदरार; खाईउस एक घटना के बाद से दोनों के बीच एक बारीक-सी दरार पैदा हो गई है।
  198. समाज और सामयिक विषयअभूतपूर्वअभूतपूर्व संकट के सामने सरकार की आपदा-प्रबंधन क्षमता एक बार फिर कठघरे में है।
  199. क़ानून और संस्थाएँपूरा करना; संतुष्ट करनाअनुमति की शर्तें पूरी होने पर भी परिपाटी का बहाना बनाकर आवेदन दबा दिए जाने के मामले कम नहीं।
  200. भाषा और मीडियाशीर्षकचुनिंदा शीर्षकों को काटकर एक साथ सजाने की तरकीब कुशल छवि-हेरफेर के सिवा कुछ नहीं है।
  201. संयोजक और शर्तेंरास्ता; सड़कआस-पास के लोग जो भी कहते रहे, वह शांत भाव से अपनी राह पर चलती रही।
  202. मूल्यांकन और अनिवार्यतापहचान में न आनामरम्मत की मेहनत रंग लाई — वह पुराना मकान पहचान में न आने की हद तक रहने लायक हो गया।
  203. उन्नत व्यावसायिकमार्ग; रास्तामंज़ूरी देने वाले की मनमर्ज़ी से बात पलट न जाए, इसलिए मैंने पहले ही मुद्दे व्यवस्थित कर सहमति तक पहुँचने का रास्ता दिखा दिया।
  204. प्रकृति और जीवनरास्ता; सफ़रबहाली और पुनर्निर्माण की लंबी राह का पहला कदम वर्तमान स्थिति की सटीक समझ से ही शुरू होता है।
  205. तर्क और वाद-विवादनिकालना; मार्गदर्शन करनाउपर्युक्त विवेचन से निकलने वाला निष्कर्ष यह है कि व्यवस्था में ही आमूल बदलाव अनिवार्य है।
  206. समाज और सामयिक विषय-मिक (महामारी का दूसरा भाग)इस महामारी ने चिकित्सा-मोर्चे पर कर्मचारियों की पुरानी कमी को फिर से उजागर कर दिया।
  207. उन्नत व्यावसायिकतीनबहस बिखरने लगती है, इसलिए पहले मुझे मुद्दों को तीन बिंदुओं में समेट लेने दीजिए, फिर आगे बढ़ें।
  208. तर्क और वाद-विवादमिलना; पाया जानापरिकल्पना कितनी भी आकर्षक क्यों न हो, एक भी प्रतिसाक्ष्य मिल जाए तो सिद्धांत ढह जाता है।
  209. उन्नत केइगो और औपचारिकताअनुमान; कोटेशनआपका मूल्य-अनुमान देखकर मैं इसे कंपनी में फिर से विचारार्थ रखूँगा।
  210. मूल्यांकन और अनिवार्यतामानना; स्वीकार करनाउसके जैसी काबिलियत हो, तो उसका चुना जाना स्वाभाविक ही था — कंपनी में यह बात सब मानते हैं।
  211. संयोजक और शर्तेंसब; सभीसब लोग आ भी गए हैं, तो क्या अब बैठक शुरू कर लें?
  212. समाज और सामयिक विषयपुनर्विचार; समीक्षामौजूदा कर-व्यवस्था में निष्पक्षता की दृष्टि से आमूल सुधार की ज़रूरत है।
  213. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशपुनर्विचार करनाजर्जर हो चुकी व्यवस्था को जड़ से बदलना बेहद श्रमसाध्य काम है, पर इससे बचा नहीं जा सकता।
  214. संयोजक और शर्तेंआप सब (आदरसूचक)मेरी क्षमता भले ही सीमित हो, फिर भी अपनी थोड़ी-सी शक्ति लगाकर मैं आप सबके काम आना चाहता हूँ।
  215. तर्क और वाद-विवादमानना; समझनाइतिहास की गति को अनिवार्य मानें या संयोगों का जमावड़ा — इसी पर व्याख्याएँ बुरी तरह बँट जाती हैं।
  216. वर्णन और अलंकारबंदरगाह नगरबंदरगाह वाले शहर की साँझ में समुद्र की गंध और मछली भूनने का धुआँ आपस में घुले-मिले तैर रहे थे।
  217. ज़ोर, सीमा और चरमअनदेखा करना; चूक जानाइस घोटाले में जिस टीम ने पर्दा डाला वह भी दोषी है, और जिस मुख्यालय ने आँखें मूँद लीं वह भी।
  218. जीवन और मूल्यअपनी हैसियतमैं दिखावा किए बिना, अपनी हैसियत के मुताबिक जीवन जीने का ध्यान रखता हूँ।
  219. भाषा और मीडियाआँखें फाड़कर देखना; पहरा देनायुवाओं की भाषा की शब्द-गढ़ने की ताकत चौंकाने वाली है, फिर भी उनमें से मुट्ठी भर ही टिक पाते हैं।
  220. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशदिखावटबस दिखावे की फ़िक्र करना और असली सार को अनदेखा कर देना — यह तो सिरे से उलटी बात है।
  221. क़ानून और संस्थाएँपहचान; हैसियतक़ानून के सामने पद या हैसियत की परवाह किए बिना सब पर बराबर दायित्व होते हैं।
  222. प्रकृति और जीवनसहानुभूति; हालचाल पूछनाआपदा से प्रभावित सभी लोगों के प्रति मैं हृदय से सहानुभूति व्यक्त करता हूँ।
  223. ज़ोर, सीमा और चरमकानसबने ध्यान से सुना — यह ऐसा असरदार सुझाव था जो सिर्फ़ मैदान को जानने वाला ही दे सकता है।
  224. भाषा और मीडियासंदर्भ; क्रमबात बिना किसी सिलसिले के इधर-उधर उछल रही थी, इसलिए श्रोता मुख्य बिंदु पकड़ ही नहीं पा रहे थे।
  225. संस्कृति और कलालालित्य; परिष्कारहेइआन दरबार में पली-बढ़ी वह परिष्कृत संस्कृति बाद के युगों की कला पर अपार प्रभाव छोड़ गई।
  226. जीवन और मूल्यअजीब"अब मेरा एक एहसान तुम पर रहा"—उसने मज़ाक के लहजे में कहा, मगर उसकी आँखों में अजीब-सी गंभीरता थी।
  227. संस्कृति और कलासूक्ष्म आनंदइस स्याही-चित्र की असली सुंदरता खींची गई रेखाओं में नहीं, बल्कि जान-बूझकर छोड़े गए ख़ाली स्थान में है।
  228. संयोजक और शर्तेंभविष्यचाहे कितना ही बड़ा विशेषज्ञ क्यों न हो, भविष्य को पूरी तरह ठीक-ठीक बताना किसी के बस की बात नहीं।
  229. शैक्षणिकमोहित करना; आकर्षणगणितीय सत्य की सार्वभौमिकता ने ही प्राचीन काल से दार्शनिकों को निरंतर मोहित किए रखा है।
  230. तर्क और वाद-विवादआकर्षणपरिकल्पना कितनी भी आकर्षक क्यों न हो, एक भी प्रतिसाक्ष्य मिल जाए तो सिद्धांत ढह जाता है।
  231. शैक्षणिकमाना जानायुवाओं में सोशल मीडिया पर बिताया जाने वाला समय बढ़ने की प्रवृत्ति देखी जा रही है।
  232. मनोविज्ञान और सूक्ष्म भावमोह में लिपटाबहाने पर बहाने बनाकर चिपके रहने से कहीं सुंदर है गरिमा के साथ पीछे हट जाना।
  233. मनोविज्ञान और सूक्ष्म भावजनमत; जनइच्छाजो नेता सत्ता मिलते ही घमंडी हो जाए, उसे जनमत जल्द ही ठुकरा देगा।
  234. क़ानून और संस्थाएँलोकतंत्र; लोकतांत्रिकअभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र की जड़ में बसा अधिकार है, पर वह असीमित रूप से मान्य नहीं।
  235. संस्कृति और कलाजाति; राष्ट्रराष्ट्र-निर्माण की पौराणिक कथा स्वयं ऐतिहासिक तथ्य नहीं है, फिर भी उसने जाति की आत्म-छवि गढ़ने में अहम भूमिका निभाई है।
  236. तर्क और वाद-विवादसब लोग; सभी"सब यही कहते हैं" वाली दलील बहुसंख्या के बल पर टिकी एक क्लासिक कुतर्क है।
  237. भाषा और मीडियाशून्य; अभाव"sekkaku" शब्द में यह भाव झलकता है कि किसी की मेहनत या सद्भावना व्यर्थ न जाने पाए।
  238. जीवन और मूल्यबिना सहायताभले ही बिलकुल अकेला और असहाय पड़ जाऊँ, सच कहता रहूँगा—यही एक पत्रकार के रूप में मेरा संकल्प है।
  239. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशअसंबद्ध"सब्र का फल मीठा होता है" — यह ख़ुद से कहते हुए वह बिना किसी चमक-दमक वाले बुनियादी शोध में चुपचाप जुटी रही।
  240. संयोजक और शर्तेंकी ओर बढ़नालग रहा था कि अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे सुधर रही है, तभी अब फिर से मंदी के संकेत दिखने लगे हैं।
  241. ज़ोर, सीमा और चरमलेने जाना; स्वागत करनाबातचीत आख़िरी दौर में है, एक पल के लिए भी ढिलाई बरतने की इजाज़त नहीं।
  242. जीवन और मूल्यपुराने ज़माने मेंबहुत पहले से ही उससे मेरी नहीं पटती; एक ही मेज़ पर बैठे रहने भर से मन थक जाता है।
  243. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशसामना करनाइस पेचीदा समस्या से जमकर, इत्मीनान से जूझने का हौसला चाहिए।
  244. मनोविज्ञान और सूक्ष्म भावपुरस्कृत करना; बदला चुकानाजो मेहनत बेकार गई, उसे सोचते ही सीने में असह्य टीस उठती है।
  245. उन्नत व्यावसायिककी ओर मोड़नाअनुबंध पर हस्ताक्षर की ओर बढ़ते हुए, अब हम सुपुर्दगी की तारीख़ और क़ीमत की शर्तें तय करने के चरण में हैं।
  246. संयोजक और शर्तेंरूखेपन से; दो टूकउसका मुझ पर बहुत एहसान है, इसलिए मैं उसकी गुज़ारिश को यूँ ही ठुकरा नहीं सका।
  247. संयोजक और शर्तेंअनदेखीचाहे कंपनी का अध्यक्ष ही क्यों न हो, उसे एकतरफ़ा ढंग से सेवा-नियमों की अनदेखी करने की इजाज़त नहीं है।
  248. संयोजक और शर्तेंबल्कि; उल्टेमुझे लगा था कि विरोध होगा, पर उल्टे मेरे बॉस ने मेरे प्रस्ताव का ज़ोरदार समर्थन किया।
  249. शैक्षणिकअनभिज्ञता; अचेतनताहम अक्सर अपनी समझ की सीमाओं से अनजान रहते हुए ही दो-टूक फ़ैसले सुना देते हैं।
  250. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशअसंख्यनई दवा बनाना ऐसा काम है जो अनगिनत प्रयोग और असफलताओं के बाद ही फल देता है — सोचकर ही सिर चकरा जाए।
  251. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशबेटाविद्रोही उम्र के बेटे से माता-पिता बुरी तरह परेशान लगते हैं।
  252. संयोजक और शर्तें(अनुबंध) करना; बाँधनासमझौता तो हो गया, पर औपचारिक हस्ताक्षर होने तक कुछ भी हो सकता है।
  253. मूल्यांकन और अनिवार्यताग़ैर-ज़िम्मेदारऐसी ग़ैर-ज़िम्मेदाराना बात कही है, तो आलोचना झेलनी ही पड़ेगी।
  254. ज़ोर, सीमा और चरमव्यर्थ; बरबादीआपदा-पीड़ितों में बाँटी जाने वाली राहत सामग्री का एक भी हिस्सा बर्बाद नहीं होना चाहिए।
  255. ज़ोर, सीमा और चरमबिना अनुमतिवजह चाहे जो भी हो, बिना अनुमति गोपनीय दस्तावेज़ बाहर ले जाना कतई माफ़ी लायक नहीं।
  256. मनोविज्ञान और सूक्ष्म भावछाती; सीनाजो मेहनत बेकार गई, उसे सोचते ही सीने में असह्य टीस उठती है।
  257. ज़ोर, सीमा और चरमअक्षम; अयोग्यवह बस शिकायतें गिनाता रहता है — तनख़्वाह ख़राब है, बॉस नाकाबिल है — और नौकरी बदलता रहता है।
  258. मूल्यांकन और अनिवार्यताअनाम; अज्ञातदुनिया को हिला देने लायक एक बड़ी खोज एक गुमनाम प्रयोगशाला से निकली।
  259. संस्कृति और कलागांवइस गाँव में आज भी वह परंपरा चली आ रही है कि नववर्ष पर पूरा कुनबा एक साथ जुटता है।
  260. संयोजक और शर्तेंअसंभव; ज़बरदस्तीचुपचाप आराम कर लेता तो अच्छा था, पर ज़ोर डालते-डालते आख़िर अस्पताल पहुँच गया।
  261. भाषा और मीडियाआँख; परखसूचना का सच-झूठ परखने वाली दृष्टि विकसित किए बिना इस युग में टिक पाना शायद संभव नहीं।
  262. जीवन और मूल्यप्रतिष्ठित परिवारकिसी प्रांतीय प्रतिष्ठित परिवार में जन्मी वह बचपन से ही तरह-तरह के बंधनों में जकड़ी रही और अपनी इच्छा कभी नहीं चला सकी।
  263. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशस्पष्टदो नावों पर पैर रखने वाला डूबता है — पहले प्राथमिकताएँ साफ़ करना और संसाधन एक जगह केंद्रित करना ज़रूरी है।
  264. वर्णन और अलंकारप्रसिद्ध चित्रवह प्रसिद्ध चित्र किसी अलग-थलग गलियारे के कोने में चुपचाप, बिना किसी की नज़र में आए टँगा था।
  265. क़ानून और संस्थाएँस्पष्ट उल्लेखकर चुकाना नागरिकों के तीन प्रमुख कर्तव्यों में से एक के रूप में संविधान में स्पष्ट लिखा है।
  266. मनोविज्ञान और सूक्ष्म भावस्पष्ट कथनयह रिपोर्ट अपना निष्कर्ष खुलकर नहीं कहती, पर पंक्तियों के बीच पढ़ें तो उसका विरोधी रुख़ साफ़ है।
  267. संस्कृति और कलाउत्कृष्ट कृतियह उपन्यास ऐसी उत्कृष्ट कृति है जिसे हर बार दोबारा पढ़ने पर नया स्वाद मिलता है।
  268. संस्कृति और कलाविज़िटिंग कार्डनौकरी की दुनिया में नया होने के नाते सबसे पहले मुझे विज़िटिंग कार्ड के आदान-प्रदान का सलीका रटाया गया।
  269. क़ानून और संस्थाएँस्पष्ट संकेतनिजी जानकारी हासिल करने के लिए संबंधित व्यक्ति की स्पष्ट सहमति अनिवार्य है।
  270. क़ानून और संस्थाएँआदेश देनाफ़ैसला सुनाए जाने के साथ प्रतिवादी को मुआवज़ा चुकाने का आदेश दिया गया।
  271. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांश(मन में) अंकित करनाजब सब कुछ सही चल रहा हो, तभी यह बात गाँठ बाँध लेनी चाहिए कि लापरवाही ही सबसे बड़ी दुश्मन है।
  272. ज़ोर, सीमा और चरमउस्ताद; विशेषज्ञअगर इस पारंपरिक कला को आगे बढ़ाने का ज़िम्मा किसी को सौंपना हो, तो उस उस्ताद के अलावा कोई नाम सूझता ही नहीं।
  273. मूल्यांकन और अनिवार्यतास्पष्टइतनी साफ़ ग़लती को तो किसी विशेषज्ञ से पूछे बिना ही सुधारा जा सकता है।
  274. उन्नत केइगो और औपचारिकतापरलोक में शांतिदिवंगत के जीवनकाल की स्मृतियों को याद करते हुए मैं पूरे हृदय से उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना करता हूँ।
  275. भाषा और मीडियाउत्कृष्ट लेखनउत्तम लेखन उसी संक्षिप्तता में बसता है जो अनावश्यक अलंकारों को छाँट देने से मिलती है।
  276. उन्नत केइगो और औपचारिकतापरेशानी; असुविधामेरी ही कमियों के कारण आपको इतनी असुविधा हुई — इसके लिए मुझे गहरी लज्जा है।
  277. जीवन और मूल्यका दिखावा करना"अब मेरा एक एहसान तुम पर रहा"—उसने मज़ाक के लहजे में कहा, मगर उसकी आँखों में अजीब-सी गंभीरता थी।
  278. तर्क और वाद-विवादतंत्रआँकड़ों में दिखे सहसंबंध से शुरू करके कारण की क्रियाविधि को सिद्धांत से पुष्ट किया जाए, तभी शोध पूरा होता है।
  279. शैक्षणिकअंधा (अंध परीक्षण में)नई दवा की कारगरता दोहरे-अंधे परीक्षण से सिद्ध हुई, और आख़िरकार मंज़ूरी का रास्ता खुल गया।
  280. मनोविज्ञान और सूक्ष्म भावसंपन्न होनासुविधाजनक परिस्थितियों में होने का अपराधबोध ही उसे सामाजिक कार्यों की ओर खींच लाया।
  281. समाज और सामयिक विषयके संबंध में; घेरनाशिक्षा के अवसरों की असमानता पीढ़ी दर पीढ़ी जमती जा रही है।
  282. समाज और सामयिक विषयके संबंध में; चक्कर लगानापरमाणु बिजलीघरों को दोबारा चालू करने के औचित्य पर जनता से राय माँगी जा रही है।
  283. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशतात्कालिक; निकटवर्तीतात्कालिक नतीजों के मोह में पड़े बिना, टिककर और गंभीरता से शोध में जुटने का रवैया अपेक्षित है।
  284. उन्नत केइगो और औपचारिकताखाना; पीना (आदरसूचक)ठंडा होने से पहले कृपया ग्रहण कीजिए।
  285. ज़ोर, सीमा और चरमकाफ़ी; स्पष्ट रूप सेपिता के गुज़र जाने के बाद से माँ बहुत ही कम बोलने लगी हैं।
  286. भाषा और मीडियासंदेशसूचना-प्रधान समाज में मौन भी अपने आप में एक संदेश के रूप में ग्रहण किया जाता है।
  287. मूल्यांकन और अनिवार्यताशायद ही कभीसुबह जल्दी से कतार में लगना काम आया — मुझे वह पहला संस्करण मिल गया जो शायद ही कभी मिलता है।
  288. संयोजक और शर्तेंतेज़ी से बदलता; चकरा देने वालाएक दिन भी ढिलाई बरती, तो इस तेज़ी से बदलते उद्योग में तुम पल भर में पीछे छूट जाओगे।
  289. वर्णन और अलंकारपहलूउसकी कार्यकुशलता के बारे में एक पहलू ऐसा है जिसे ऊँचा आँका गया, यह कहना मुश्किल है।
  290. प्रकृति और जीवनप्रतिरक्षाअत्यधिक काम लगातार चलता रहे तो रोग-प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है और अप्रत्याशित संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है।
  291. क़ानून और संस्थाएँलाइसेंसबार-बार यातायात नियम तोड़ने के बाद आख़िरकार उसका लाइसेंस रद्द कर दिया गया।
  292. क़ानून और संस्थाएँदायित्व से मुक्तिप्राकृतिक आपदा से हुई देरी शर्तों के छूट-प्रावधानों में आती है, इसलिए हमारी कंपनी इसकी ज़िम्मेदारी नहीं ले सकती।
  293. मूल्यांकन और अनिवार्यतासूक्ष्म; विस्तृतजिसने इतनी बारीकी से तैयारी की, उसकी जीत को वही जीत कहना चाहिए जो होनी ही थी।
  294. ज़ोर, सीमा और चरमईमेलयूँ हिचकिचाते मत रहो — फ़ोन करो या मेल भेजो, पहले उसी से पूछ लो।
  295. उन्नत केइगो और औपचारिकताआदेश देनाउस दिन संचालन का दायित्व मेरा रहेगा, इसलिए जो भी आवश्यकता हो, नि:संकोच कहिएगा।
  296. उन्नत व्यावसायिकथोड़ा औरयह पहलू मुझसे छूट गया था। लगता है इस पर चर्चा थोड़ी और गहरी करने लायक है, है ना?
  297. उन्नत व्यावसायिकबिल्कुल नहीं; ज़रा भी नहींविभाग की देखरेख करने वाले के नाते मेरा ज़रा भी इरादा नहीं कि नाकामी का दोष मातहतों पर डाल दूँ।
  298. प्रकृति और जीवनलकड़ी का बनावास्तविकता यह है कि जर्जर लकड़ी के मकानों को भूकंपरोधी बनाने में बड़ी रकम और लंबा समय लगता है।
  299. तर्क और वाद-विवादलाना; उत्पन्न करनायह धारणा कि प्रगति अनिवार्य रूप से सुख लाती है, अब बहुत भोली जान पड़ती है।
  300. जीवन और मूल्यचुप रहनाकमज़ोरी की बात न करना, चुप रहकर नतीजों से दिखा देना—यही उसका अपना खास सौंदर्यबोध था।
  301. जीवन और मूल्यपास होनाजिस सत्ताधारी में ज़रा-सी भी अंतरात्मा न हो, उससे बढ़कर बेकाबू कुछ नहीं होता।
  302. शैक्षणिकउपयोग करना; प्रयोग करनाइस लेख में हम वास्तविक आँकड़ों की मदद से प्रस्तावित विधि की वैधता की जाँच करते हैं।
  303. उन्नत व्यावसायिकघर ले जानाआज की बैठक में तय हुआ कि कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जाएगा; हर कोई इसे साथ ले जाकर दोबारा सोचेगा।
  304. उन्नत व्यावसायिकशेयरधारिताकई सहायक कंपनियों की देखरेख करने वाली होल्डिंग कंपनी बनने से समूह के निर्णय एक जगह केंद्रित हो गए।
  305. जीवन और मूल्यछेड़ना (विषय); बाहर ले जानाअभी-अभी बीमारी से उठे सहकर्मी का ख्याल करके मैंने जानबूझकर काम की बात नहीं छेड़ी।
  306. भाषा और मीडियाऔर अधिकमेरे बॉस ने बार-बार टोका कि और संक्षेप में लिखो और निष्कर्ष सबसे पहले रखो।
  307. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशउचित; ठीकपहली नज़र में उसकी दलील ठीक लगती है, पर असल में यह अपनी कंपनी के पक्ष के आँकड़े गिनाकर अपना उल्लू सीधा करने से ज़्यादा कुछ नहीं।
  308. ज़ोर, सीमा और चरमरखनाएक बार की नाकामी के आधार पर उसकी पूरी काबिलियत को नकारना ठीक नहीं।
  309. जीवन और मूल्यरख पानामेरा मानना है कि गुमनाम काम पर गर्व कर पाना ही किसी व्यक्ति का असली कद तय करता है।
  310. शैक्षणिकमॉडलयह पूर्वानुमान-मॉडल सटीक तो बहुत है, पर इसकी दिक़्क़त यह है कि नतीजों की व्याख्या इंसान के लिए कठिन है।
  311. उन्नत व्यावसायिकआधार; मूलकच्चे मसौदे से शुरू करके तीन दौर की चर्चा के बाद आख़िरकार ऐसी सहमति बनी जिसे सब स्वीकार कर सके।
  312. क़ानून और संस्थाएँपर आधारित होनाकृपया पहले से ध्यान रखें कि आवश्यक सूचना न देने पर क़ानून के तहत जुर्माना लगाया जा सकता है।
  313. उन्नत केइगो और औपचारिकताखरीद; माँगआपने जो वस्तु ख़रीदी है, उसे हम आज ही रवाना कर देंगे।
  314. भाषा और मीडियाके विपरीत होनाबिना पुष्टि की सूचना को ब्रेकिंग न्यूज़ के रूप में चलाना पत्रकारिता की नैतिकता के विरुद्ध कृत्य है।
  315. उन्नत व्यावसायिकवापस करना; लौटानाअब तक जो बातचीत गढ़ी गई है, उसे शून्य पर लौटाना दोनों पक्षों के लिए फ़ायदे का सौदा नहीं होगा।
  316. संयोजक और शर्तेंलौटना; वापस जानाअब पछताने से कुछ नहीं होगा — खोया हुआ भरोसा वापस नहीं आने वाला।
  317. संयोजक और शर्तेंव्यक्तिअपने वतन से दूर रहने वाला होने के कारण, उसके मन में घर की याद औरों से कहीं ज़्यादा गहरी है।
  318. मनोविज्ञान और सूक्ष्म भावबोलने का ढंगउस समीक्षक के बोलने के अंदाज़ से दूसरों को हेय समझने वाला घमंड टपकता है।
  319. मनोविज्ञान और सूक्ष्म भावकहानीकहानी अपना अंत नहीं दिखाती, उसे पाठक की कल्पना पर छोड़ देती है — और इसीलिए गहरी गूँज छोड़ जाती है।
  320. वर्णन और अलंकारहाव-भाव; रंग-ढंगउसके हाव-भाव में एक शांत गरिमा थी जो अच्छे संस्कारों का पता देती थी।
  321. संयोजक और शर्तेंचीज़ें; बातेंउसमें चीज़ों को निराशावादी नज़रिए से देखने की प्रवृत्ति है।
  322. संयोजक और शर्तेंशांत; कम बोलने वालादेखने में वह शांत स्वभाव का लगता है, पर जैसे ही बहस शुरू होती है, वह सबसे ज़्यादा जोश से अपनी बात रखता है।
  323. मूल्यांकन और अनिवार्यताअब (नहीं)ऐसे लांछन उड़ रहे थे जिन्हें सुनना भी असह्य था; बहस अब बहस रह ही नहीं गई थी।
  324. उन्नत व्यावसायिकझगड़ा होना; विवाद होनाअधूरी तैयारी से बाद में झगड़ा तय है, इसलिए जो भी बात अस्पष्ट है उसे अभी ही निपटा लेते हैं।
  325. संयोजक और शर्तेंउगल देना; लीक करनाअगर लापरवाही में दिल की बात मुँह से निकल गई, तो पल भर में तुम टैब्लॉइड पत्रिकाओं का शिकार बन जाओगे।
  326. वर्णन और अलंकारजंगलजंगल की गहराई में बढ़ते-बढ़ते बाहरी दुनिया का शोर दूर होता गया और कानों पर दबाव डालती-सी ख़ामोशी ही बची रही।
  327. भाषा और मीडियाअनभिज्ञ; बाहरी व्यक्तितकनीकी शब्दों से भरा लेखन सटीक तो होता है, पर बदले में उसमें एक ऐसी ठंडक आ जाती है जो गैर-विशेषज्ञ को पास नहीं फटकने देती।
  328. ज़ोर, सीमा और चरमशिकायतवह बस शिकायतें गिनाता रहता है — तनख़्वाह ख़राब है, बॉस नाकाबिल है — और नौकरी बदलता रहता है।
  329. भाषा और मीडियाशब्दावली; शब्द-चयनजनमत सर्वेक्षण के नतीजे केवल एक सवाल के शब्दों से जिस दिशा में चाहें मोड़े जा सकते हैं।
  330. जीवन और मूल्यआलोचना का निशानाआलोचना की मार सीधे झेलने की तैयारी के बिना किसी संगठन का सुधार पूरा नहीं किया जा सकता।
  331. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशभूनना; सेंकनाविद्रोही उम्र के बेटे से माता-पिता बुरी तरह परेशान लगते हैं।
  332. उन्नत व्यावसायिकअधिकारी; निदेशकअगर हमने मुद्दों को एक कदम और पक्का नहीं किया, तो अगले हफ़्ते की बोर्ड बैठक में आड़े हाथों लिए जाएँगे।
  333. क़ानून और संस्थाएँसरकारी कार्यालयनिवास बदलने पर चौदह दिनों के भीतर नए पते के नगर-कार्यालय में सूचना जमा करनी होती है।
  334. भाषा और मीडियाअनुवाद करनाबोली की अपनी खास कहन में ऐसी गरमाहट बसी होती है जिसे मानक भाषा में पूरी तरह उतारा ही नहीं जा सकता।
  335. ज़ोर, सीमा और चरमवादा; अपॉइंटमेंटवादा तोड़ना उसकी सिर्फ़ इस बार की बात नहीं है।
  336. संयोजक और शर्तेंकाम आनामेरी क्षमता भले ही सीमित हो, फिर भी अपनी थोड़ी-सी शक्ति लगाकर मैं आप सबके काम आना चाहता हूँ।
  337. संस्कृति और कलामहामारीकहा जाता है कि वह त्योहार महामारी के प्रकोप को शांत करने के लिए शुरू हुआ था।
  338. जीवन और मूल्यभूमिकाविद्या का धाम होने के नाते विश्वविद्यालय समाज की अंतरात्मा की भूमिका निभाता है।
  339. मनोविज्ञान और सूक्ष्म भावविकसित करना; पालन-पोषण करनाजो विपत्ति में भी न टूटे — ऐसी लचीली, कोमल दृढ़ता ही हमें विकसित करनी चाहिए।
  340. समाज और सामयिक विषयआसानआर्थिक प्रोत्साहन और राजकोषीय अनुशासन को साथ साधना — यह कहना आसान, करना कठिन का सटीक उदाहरण है।
  341. संयोजक और शर्तेंआराम करना; छुट्टी लेनाचुपचाप आराम कर लेता तो अच्छा था, पर ज़ोर डालते-डालते आख़िर अस्पताल पहुँच गया।
  342. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशरीढ़; आधार-स्तंभकारोबार में विविधता के नाम पर हाथ ज़्यादा फैलाओगे, तो दो नावों वाली हालत हो जाएगी और मुख्य धंधे की रीढ़ तक हिल सकती है।
  343. भाषा और मीडियाबेहद; अंधाधुंधबेतहाशा विदेशी शब्द जड़ते जाने वाली बोली कभी-कभी सामग्री के खोखलेपन को ढकने वाला धुएँ का पर्दा भर होती है।
  344. क़ानून और संस्थाएँनियम और शर्तेंप्राकृतिक आपदा से हुई देरी शर्तों के छूट-प्रावधानों में आती है, इसलिए हमारी कंपनी इसकी ज़िम्मेदारी नहीं ले सकती।
  345. समाज और सामयिक विषयउतावला; जी-जान सेकर-रियायतों के ज़रिए सरकार कंपनियों को ग्रामीण क्षेत्रों में लाने के लिए एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा रही है।
  346. मनोविज्ञान और सूक्ष्म भावमें वास करनाहठ और कोरी ज़िद में बाल बराबर का फ़र्क है, पर जिस हठ के पीछे विश्वास हो उसमें एक तरह की गरिमा होती है।
  347. भाषा और मीडियाग़ज़ब; ख़तरनाक (बोलचाल)किसी के ध्यान दिए बिना ही "yabai" शब्द का अर्थ फैलकर ऐसा हो गया कि वह प्रशंसा और निंदा—दोनों में चलने लगा।
  348. ज़ोर, सीमा और चरम(वादा) तोड़ना; फाड़नावादा तोड़ना उसकी सिर्फ़ इस बार की बात नहीं है।
  349. संस्कृति और कलाअसंस्कृत; भद्दाअशिष्टता के जोख़िम पर कह रहा हूँ, पर इस मौके पर आप थोड़ा सलीके से पेश आइए।
  350. जीवन और मूल्यमहत्वाकांक्षाअपनी हैसियत से बड़ी महत्वाकांक्षा पालने से बेहतर है कि मैं अपनी सीमा के अनुरूप सुख की तलाश करूँ।
  351. वर्णन और अलंकारपहाड़दूर के पहाड़ों की चोटी-रेखा पर सुबह का कोहरा पतला और लंबा फैला हुआ था।
  352. मूल्यांकन और अनिवार्यतारोग; बीमारीयह बीमारी बरसों की जमा हुई अत्यधिक थकान का नतीजा है। यह वही त्रासदी है जिसका होना तय था।
  353. जीवन और मूल्यबीमारी से उबरनाअभी-अभी बीमारी से उठे सहकर्मी का ख्याल करके मैंने जानबूझकर काम की बात नहीं छेड़ी।
  354. ज़ोर, सीमा और चरमथमना; रुकनाहमारे गुरु ने जीवन भर जिस आदर्श का पीछा करना कभी नहीं छोड़ा, वह आज भी हमारा मार्गदर्शक है।
  355. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशछोड़ना; बंद करनाबार-बार नौकरी बदलना बंद करो और अब एक ही काम में जमकर टिक जाओ।
  356. मूल्यांकन और अनिवार्यताकाम की सार्थकताजितनी बड़ी मुश्किल हो, उसे पार करने पर उतनी ही बड़ी उपलब्धि का एहसास होता है — यही तो इसे सार्थक बनाता है।
  357. जीवन और मूल्यपूरा करनाजब बात यहाँ तक आ पहुँची है, तो अब मन कड़ा करके आखिर तक निभाने के सिवा चारा नहीं।
  358. मनोविज्ञान और सूक्ष्म भावअसहाय; व्यथितमेहनत बेकार जाने के बाद जब उसने अपना सपना छोड़ा, तो मेरे भीतर एक लाचार उदासी उमड़ आई।
  359. ज़ोर, सीमा और चरमकर सकना; (यारे) शिकायती शब्दवह बस शिकायतें गिनाता रहता है — तनख़्वाह ख़राब है, बॉस नाकाबिल है — और नौकरी बदलता रहता है।
  360. भाषा और मीडियानरम करनाजापानी की गोल-मोल अभिव्यक्तियाँ इनकार को नरम बनाने वाला स्नेहक हैं, और साथ ही विदेशियों के लिए एक दुर्बोध दीवार भी।
  361. वर्णन और अलंकारनहाने के बादनहाकर निकली उसकी त्वचा से साबुन की हल्की-सी महक उठ रही थी।
  362. उन्नत केइगो और औपचारिकताश्रेष्ठता; बढ़तवैश्विक बाज़ार में बढ़त हासिल करने के लिए कंपनी शोध और विकास में भारी रकम लगा रही है।
  363. शैक्षणिकसार्थक (सांख्यिकीय)प्रयोग के परिणामस्वरूप दोनों समूहों के बीच सांख्यिकीय रूप से सार्थक अंतर पाया गया।
  364. समाज और सामयिक विषयतरजीह; विशेष रियायतकर-रियायतों के ज़रिए सरकार कंपनियों को ग्रामीण क्षेत्रों में लाने के लिए एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा रही है।
  365. वर्णन और अलंकारसांझ; गोधूलिसाँझ की रोशनी गलियारे में गहरी छायाएँ डाल रही थी और खंभों की रूपरेखा उभार रही थी।
  366. मनोविज्ञान और सूक्ष्म भावमतदाताहार न मान पाने की अपनी कमज़ोरी उजागर करके उस उम्मीदवार ने मतदाताओं का भरोसा एक झटके में खो दिया।
  367. शैक्षणिकमान्य; वैधनई दवा की कारगरता दोहरे-अंधे परीक्षण से सिद्ध हुई, और आख़िरकार मंज़ूरी का रास्ता खुल गया।
  368. क़ानून और संस्थाएँवित्तपोषण; ऋणऋण की मंज़ूरी मिलने से पहले वित्तीय संस्था बारीकी से जाँच करती है।
  369. संयोजक और शर्तेंचैंपियनशिप; जीतदस साल बाद मिली जीत थी, इसलिए पूरा शहर जश्न में डूब गया।
  370. क़ानून और संस्थाएँरखना; धारण करनाख़राब वस्तु के लिए उपभोक्ता को धन-वापसी माँगने का अधिकार है।
  371. शैक्षणिकप्रबलता; बढ़तजीन प्रभावी हैं या परिवेश — यह सवाल अब निरर्थक ही कहा जाना चाहिए।
  372. उन्नत केइगो और औपचारिकताप्राथमिकताकारोबार के पुनर्गठन के अवसर पर कंपनी ने कर्मचारियों की नौकरियों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की नीति घोषित की।
  373. समाज और सामयिक विषयआकर्षित करना; आमंत्रणकर-रियायतों के ज़रिए सरकार कंपनियों को ग्रामीण क्षेत्रों में लाने के लिए एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा रही है।
  374. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशआसानी से; से भी अधिकअपने शुरुआती संघर्ष के दिनों को सोचूँ तो तीन साल नहीं, यहाँ तक पहुँचने में पूरे दस साल लग गए।
  375. वर्णन और अलंकारडूबता सूरजढलते सूरज की रोशनी में नहाया वह प्राचीन मंदिर लंबी छाया खींचते हुए अपनी भव्य उपस्थिति उभार रहा था।
  376. वर्णन और अलंकारसांझ की लालिमासाँझ के आसमान में लाल-सिंदूरी बादलों की कई लकीरें फैली हुई हैं।
  377. उन्नत केइगो और औपचारिकताचिंताउस मामले को लेकर अध्यक्ष महोदय भी काफ़ी समय से चिंतित प्रतीत होते हैं।
  378. तर्क और वाद-विवादश्रेष्ठता या हीनताजब मूल्यांकन ही सापेक्ष है, तो निरपेक्ष श्रेष्ठता पर बहस करने से कुछ हासिल नहीं।
  379. उन्नत केइगो और औपचारिकता(यह) सूचना कि; कारणमुझे ज्ञात हुआ कि आप सब स्वस्थ हैं — इससे बड़ी प्रसन्नता की बात और क्या हो सकती है।
  380. संस्कृति और कलाटेढ़ापनहाथ की कारीगरी की वह हल्की-सी टेढ़ाई ही इस प्याले को एक अवर्णनीय आकर्षण दे देती है।
  381. वर्णन और अलंकारबर्फ; हिमबर्फ़ से ढकी देर रात की सड़कों पर ऐसी ख़ामोशी फैली थी मानो उसने हर आवाज़ सोख ली हो।
  382. मनोविज्ञान और सूक्ष्म भावचल बसनाजिसने छोटा बच्चा छोड़कर दुनिया छोड़ी, उसकी डायरी पढ़कर मन बेतरह भर आया।
  383. मूल्यांकन और अनिवार्यताझकझोरनाइस कृति की अत्यंत प्रभावशाली शैली पाठक के मन को झकझोरे बिना नहीं रहती।
  384. जीवन और मूल्यसमझौता कर पानादक्षता के नाम पर कुछ भी कुर्बान किया जा सकता है—यही वह सोच है जिस पर मैं कभी नहीं झुक सकता।
  385. प्रकृति और जीवनपरिवहनआपूर्ति नेटवर्क टुकड़ों में कट जाने के कारण आपदाग्रस्त क्षेत्र तक सामान पहुँचाना अत्यंत कठिन हो गया है।
  386. समाज और सामयिक विषयसमृद्ध; संपन्नयह कहना अतिशयोक्ति न होगी कि लैंगिक समानता के बिना सचमुच समृद्ध समाज कभी नहीं बन सकता।
  387. शैक्षणिकसौंपनाभले-बुरे के मानदंड हर संस्कृति पर छोड़ देने वाला सापेक्षवादी रुख़ नरसंहार तक को जायज़ ठहरा देने का ख़तरा रखता है।
  388. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशलापरवाही सबसे बड़ी दुश्मनजब सब कुछ सही चल रहा हो, तभी यह बात गाँठ बाँध लेनी चाहिए कि लापरवाही ही सबसे बड़ी दुश्मन है।
  389. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशआयातमुद्रा के लगातार कमज़ोर होने से आयातित वस्तुओं की क़ीमतें और भी तेज़ी से चढ़ रही हैं।
  390. संस्कृति और कलाचाय का कपहाथ की कारीगरी की वह हल्की-सी टेढ़ाई ही इस प्याले को एक अवर्णनीय आकर्षण दे देती है।
  391. प्रकृति और जीवनउँगलीअस्पताल में होने वाले संक्रमण रोकने के लिए हाथों की स्वच्छता का कड़ाई से पालन सबसे ज़रूरी है।
  392. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशसपनामाता-पिता की उम्मीदों और अपने सपनों के बीच फँसी वह अपना रास्ता तय नहीं कर पा रही थी।
  393. संस्कृति और कलाउत्पत्ति"सायोनारा" शब्द की उत्पत्ति पर कई मत हैं, पर हर एक में बिछड़ने का भाव घुला हुआ है।
  394. मूल्यांकन और अनिवार्यताहिला देनादुनिया को हिला देने लायक एक बड़ी खोज एक गुमनाम प्रयोगशाला से निकली।
  395. जीवन और मूल्यअटलअडिग विश्वास के साथ न उतरे, तो यह सुधार बीच रास्ते में ही ठप हो जाएगा।
  396. संयोजक और शर्तेंमाफ़ करना; अनुमति देनातुम कोई नौसिखिए तो हो नहीं, इस स्तर की ग़लती माफ़ नहीं की जा सकती।
  397. संयोजक और शर्तेंधीमा; क्रमिकलग रहा था कि अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे सुधर रही है, तभी अब फिर से मंदी के संकेत दिखने लगे हैं।
  398. मनोविज्ञान और सूक्ष्म भावडगमगाना; दुविधा में होनाकर्तव्य और भावना के बीच झूलते हुए उसे ऐसे अंतर्द्वंद्व से गुज़रना पड़ा जो कलेजा चीर देता था।
  399. वर्णन और अलंकारहिलना; डोलनामोमबत्ती की लौ जब-जब काँपती, दीवार पर पड़ती मानव-छाया गहरी होकर फिर मद्धिम पड़ जाती।
  400. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशअच्छाआँकड़ों को अपनी सुविधा से काट-छाँटकर पेश करना — इस पर स्वार्थपरक तोड़-मरोड़ का आरोप लगे तो कोई अचरज नहीं।
  401. वर्णन और अलंकारअच्छाउसके हाव-भाव में एक शांत गरिमा थी जो अच्छे संस्कारों का पता देती थी।
  402. मूल्यांकन और अनिवार्यतागूँज; स्थायी प्रभाववह चौंका देने वाला अंत दर्शकों के मन पर गहरी छाप छोड़े बिना नहीं रहता।
  403. प्रकृति और जीवनमुख्य बिंदुआपदा-रोकथाम की कुंजी इसमें है कि प्रशासनिक उपाय और व्यक्तिगत तैयारी गाड़ी के दो पहियों की तरह साथ चलें।
  404. शैक्षणिकआसानवस्तुनिष्ठ तथ्य और व्यक्तिनिष्ठ व्याख्या के बीच साफ़ रेखा खींचना उतना आसान नहीं जितना कहा जाता है।
  405. उन्नत व्यावसायिकतैयारीदोनों पक्षों की इज़्ज़त बची रहे, ऐसा बीच का रास्ता कार्यालय-कर्मियों ने पहले से तैयार कर रखा था।
  406. उन्नत व्यावसायिककारक; कारणजिन मामलों में प्रगति संतोषजनक न हो, वहाँ ज़िम्मेदार को दोष देने के बजाय पहले रुकावट के कारण खँगालने चाहिए।
  407. उन्नत व्यावसायिकमांगरियायतें निकलवाने के लिए शुरुआत में ही जान-बूझकर कड़ी माँगें रख देना एक जाना-पहचाना हथकंडा है।
  408. मनोविज्ञान और सूक्ष्म भावकाम; मामलाइतनी मामूली-सी बात के लिए गुरुजी से संपर्क करने में मुझे थोड़ा संकोच होता है।
  409. क़ानून और संस्थाएँआवश्यकता; शर्तअनुमति की शर्तें पूरी होने पर भी परिपाटी का बहाना बनाकर आवेदन दबा दिए जाने के मामले कम नहीं।
  410. क़ानून और संस्थाएँदिशानिर्देश; रूपरेखाइस अनुदान के दिशानिर्देश आवेदन की तारीख़ बेहद सख़्ती से तय करते हैं और एक दिन की देरी भी स्वीकार नहीं।
  411. शैक्षणिकबचाव; समर्थनसांस्कृतिक सापेक्षवाद दूसरों के प्रति सहिष्णुता बढ़ाता है, पर साथ ही सार्वभौमिक मानवाधिकारों की रक्षा कठिन बना देता है।
  412. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशशब्दावली; पारिभाषिक शब्दतकनीकी शब्दावली से भरे अनुबंध का अनुवाद करना कमरतोड़ काम था।
  413. भाषा और मीडियासारांशप्रस्तुति से पहले कृपया शोधपत्र का सार तीन सौ अक्षरों के भीतर समेटकर जमा कीजिए।
  414. ज़ोर, सीमा और चरममहत्वपूर्ण पदचाहे उसका करियर देखें या स्वभाव, वह इस अहम पद के लिए बिलकुल उपयुक्त व्यक्ति है।
  415. समाज और सामयिक विषयआवश्यक होना; लगनामौद्रिक नीति का असर वास्तविक अर्थव्यवस्था तक पहुँचने में काफ़ी वक़्त लगता है।
  416. उन्नत व्यावसायिकसार; मूल बातसंकट-प्रबंधन का सार यही है कि सबसे बुरी स्थिति की कल्पना करके भी शांत रहकर निपटने की तैयारी रखी जाए।
  417. उन्नत केइगो और औपचारिकतामुख्य बिंदु; सारक्या मैं आपके मत के मुख्य बिंदुओं के बारे में एक बार फिर पूछ सकता हूँ?
  418. उन्नत व्यावसायिकअनुरोध; माँगअंतिम प्रस्ताव मैदान की माँगों और प्रबंधन की नीति को बारीकी से मिलाकर तैयार किया गया है।
  419. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशआख़िरकारनई दवा बनाना ऐसा काम है जो अनगिनत प्रयोग और असफलताओं के बाद ही फल देता है — सोचकर ही सिर चकरा जाए।
  420. भाषा और मीडियासारांशसार को गलत समझकर संक्षेपण करो, तो ऐसा लेख बनता है जो मूल के आशय से कोसों दूर होता है।
  421. मूल्यांकन और अनिवार्यतापूर्वानुमान; अपेक्षाबातचीत के अचानक टूट जाने के कारण हमें पूरी योजना पर नए सिरे से विचार करने को मजबूर होना पड़ा।
  422. उन्नत व्यावसायिकअपरिहार्य; मजबूरनबातचीत को आगे बढ़ाने के लिए हमें भी कुछ हद तक रियायत देने पर मजबूर होना पड़ा।
  423. मूल्यांकन और अनिवार्यताबीत जानातारीख़ निकल जाने के बाद अब "मुझे मालूम नहीं था" कहकर बच नहीं सकते।
  424. क़ानून और संस्थाएँ(लाभ) पाना; प्राप्त करनाअनुदान योजना का लाभ आख़िरकार उन्हीं गिने-चुने कारोबारियों को मिलता है जो प्रक्रियाओं में माहिर हैं।
  425. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशलालच करनाजैसा कहा जाता है, दो नावों पर पैर रखने वाला डूबता है — जो योजना सब कुछ समेटना चाहती थी, वह हर मोर्चे पर अधूरी रह गई।
  426. शैक्षणिकइच्छा; वासनाउपभोक्ता समाज में इंसान अपनी मर्ज़ी से चुनने वाला कर्ता नहीं, बल्कि वह वस्तु बन जाता है जिसकी इच्छाएँ चलाई जाती हैं।
  427. संस्कृति और कलाफ़ालतू; अतिरिक्तउसकी कृतियों में वह विशिष्ट जापानी सौंदर्य-बोध धड़कता है जो सब फ़ालतू को छाँट देता है।
  428. वर्णन और अलंकारपार्श्व चेहराबिछड़ते वक़्त उसके चेहरे की बग़ल-झलक में एक हल्की-सी उदासी छलक रही थी।
  429. मूल्यांकन और अनिवार्यताहड़पनामातहत की उपलब्धि को अपने नाम कर लेना — नेतृत्व के पद पर बैठे व्यक्ति के लिए यह बिलकुल अशोभनीय आचरण है।
  430. भाषा और मीडियाएकरूपतासभी समाचार संस्थान एक कतार में एक ही सुर अपनाते हैं—इस बात को लेकर मैं लंबे समय से चिंतित रहा हूँ।
  431. भाषा और मीडियापश्चिमी शब्दबेतहाशा विदेशी शब्द जड़ते जाने वाली बोली कभी-कभी सामग्री के खोखलेपन को ढकने वाला धुएँ का पर्दा भर होती है।
  432. संयोजक और शर्तेंबजटबजट भी मंज़ूर हो गया है, तो अब हम सचमुच पूरी तरह योजना आगे बढ़ा सकते हैं।
  433. प्रकृति और जीवनउत्तरझटकाअनुमान से बड़े पैमाने के भूकंप-झटके लगातार आते रहे, जिससे बचाव कार्य बेहद मुश्किल में पड़ गया।
  434. मनोविज्ञान और सूक्ष्म भावदिखावा करनाऊपर से तटस्थता का दिखावा और भीतर से एक पक्ष की तरफ़दारी — यह सबको पता है।
  435. संयोजक और शर्तेंपूर्वानुमानचाहे कितना ही बड़ा विशेषज्ञ क्यों न हो, भविष्य को पूरी तरह ठीक-ठीक बताना किसी के बस की बात नहीं।
  436. ज़ोर, सीमा और चरमगुंजाइशसफ़ाई देने की कोई गुंजाइश नहीं; अब सिर्फ़ माफ़ी माँगना ही बाकी है।
  437. प्रकृति और जीवनइच्छा; आवश्यकतासतत विकास का अर्थ है ऐसा विकास जो वर्तमान पीढ़ी की ज़रूरतें पूरी करे और भावी पीढ़ियों की संभावनाओं को क्षति न पहुँचाए।
  438. संयोजक और शर्तेंयोजना; निर्धारितमौसम सुधरे या न सुधरे, कल की चढ़ाई तय कार्यक्रम के मुताबिक होगी।
  439. संयोजक और शर्तेंदुनिया के सामनेपरफ़ेक्शन की तलाश में रहने के कारण ही वह अपनी कृति कभी दुनिया के सामने नहीं ला पाता।
  440. संस्कृति और कलाखाली स्थानलेखन में भी सब कुछ कह डालने के बजाय जगह छोड़ देना ही पाठक की कल्पना को जगाता है।
  441. वर्णन और अलंकारदेर रातबर्फ़ से ढकी देर रात की सड़कों पर ऐसी ख़ामोशी फैली थी मानो उसने हर आवाज़ सोख ली हो।
  442. समाज और सामयिक विषयबुलानाजिन्हें 'सीमांत बस्तियाँ' कहा जाता है, वहाँ बुनियादी प्रशासनिक सेवाएँ बनाए रखना तक बेहद कठिन हो चुका है — यही सच्चाई है।
  443. मनोविज्ञान और सूक्ष्म भावबहुत; काफ़ीबहाने पर बहाने बनाकर चिपके रहने से कहीं सुंदर है गरिमा के साथ पीछे हट जाना।
  444. प्रकृति और जीवनरोकथामहाल के वर्षों में यह आवाज़ लगातार तेज़ होती जा रही है कि इलाज से ज़्यादा रोकथाम पर ज़ोर दिया जाए।
  445. उन्नत केइगो और औपचारिकतापढ़ना; पाठ"ओ-योमि-नि-नारारेरु" को ग़लत माना जाता है; सही रूप "ओ-योमि-नि-नारु" है।
  446. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशदोबारा पढ़नाशास्त्रीय ग्रंथों को ध्यान से दोबारा पढ़ते हुए मुझे लगा कि पुराने को खँगालकर नया सीखने का अर्थ यही तो है।
  447. संयोजक और शर्तेंपढ़ने का तरीक़ा; उच्चारणजो बुनियादी आँकड़े पढ़ने में भी ग़लती करे, उसे कारोबार चलाने के लायक़ नहीं कहना ही पड़ेगा।
  448. भाषा और मीडियासमझना; व्याख्या करनानिहितार्थ पढ़ने की क्षमता के बिना पंक्तियों के बीच छिपे लेखक के असली मन को पकड़ा नहीं जा सकता।
  449. मनोविज्ञान और सूक्ष्म भावपढ़ लेना; समझ लेनाउसका पत्र संयत लहजे में है, फिर भी पंक्तियों के बीच रिसते अकेलेपन को पढ़े बिना नहीं रहा जाता।
  450. संस्कृति और कलाविवाह (वधू का); ब्याह कर जानाइलाक़े के हिसाब से आज भी ऐसी जगहें हैं जहाँ दुल्हन के विवाह से जुड़ी अनोखी रीतियाँ बची हुई हैं।
  451. समाज और सामयिक विषयसत्तारूढ़ और विपक्षी दलनई संधि की व्याख्या को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष की राय आमने-सामने टकरा रही है।
  452. उन्नत केइगो और औपचारिकतासे; की तुलना मेंउस मामले को लेकर अध्यक्ष महोदय भी काफ़ी समय से चिंतित प्रतीत होते हैं।
  453. मनोविज्ञान और सूक्ष्म भावरातविदेश में पढ़ाई की आख़िरी रात इतनी भारी लगी कि मुझे ठीक से नींद ही नहीं आई।
  454. वर्णन और अलंकारखुशी; आनंदजिस कारोबार को मैंने इतनी मेहनत से खड़ा किया, उसकी सफलता की ख़ुशी कहीं ज़्यादा गहरी थी।
  455. उन्नत केइगो और औपचारिकताहर्ष; बधाईमैं आदरपूर्वक आपको नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ अर्पित करता हूँ।
  456. वर्णन और अलंकारखुश होना; खुशी सेमेरे बॉस उम्मीद से कहीं ज़्यादा ख़ुश हुए और मेरी योजना का पूरा समर्थन किया।
  457. उन्नत केइगो और औपचारिकताठीक; अच्छा (विनम्र)क्या मैं आपके मत के मुख्य बिंदुओं के बारे में एक बार फिर पूछ सकता हूँ?
  458. मनोविज्ञान और सूक्ष्म भावआयु; उम्रहर उतार-चढ़ाव पर हिले बिना चीज़ों को दूर से देख पाना — शायद यह उम्र का ही वरदान है।
  459. जीवन और मूल्यशिकायत; कमज़ोरी की बातकमज़ोरी की बात न करना, चुप रहकर नतीजों से दिखा देना—यही उसका अपना खास सौंदर्यबोध था।
  460. वर्णन और अलंकार(संग्रहालय में) आगमनदेर रात का संग्रहालय, जहाँ किसी दर्शक की आहट तक न थी, एक तनी हुई ख़ामोशी में डूबा था।
  461. संयोजक और शर्तेंअगला सप्ताहतबीयत भी ठीक हो गई है, इसलिए मैं अगले हफ़्ते से काम पर लौटने का इरादा रखता हूँ।
  462. उन्नत केइगो और औपचारिकताउपस्थिति (स्थल पर)विशिष्ट अतिथियों के एक के बाद एक पधारने से सभागार उल्लासपूर्ण वातावरण में डूब गया।
  463. क़ानून और संस्थाएँअगले सालसंशोधित क़ानून अगले वर्ष एक अप्रैल से लागू होगा।
  464. क़ानून और संस्थाएँअगला वित्त वर्षपिछली मंत्रिमंडल बैठक में औपचारिक रूप से तय हुआ कि अगले वित्तीय वर्ष से इस व्यवस्था में आमूल बदलाव किया जाएगा।
  465. प्रकृति और जीवनजीवन रेखा (बुनियादी सेवाएँ)बिजली और गैस जैसी बुनियादी सेवाओं की बहाली में अभी कई हफ्ते और लगने की उम्मीद है।
  466. उन्नत व्यावसायिकसीमा; प्रगतिकार्यकारी स्तर पर बातचीत से कुछ नहीं निकला, इसलिए मामला शीर्ष स्तर की बैठक तक ले जाने का निर्णय हुआ।
  467. प्रकृति और जीवनअत्यधिक शिकारकभी समृद्ध रहे मछली-क्षेत्र भी अंधाधुंध शिकार और समुद्री प्रदूषण के मेल से पहचान में न आने की हद तक उजड़ गए।
  468. तर्क और वाद-विवादलापरवाह; अंधाधुंधएक ही उदाहरण के बल पर पूरे बारे में बोलना, आँकड़ों की दृष्टि से, तर्क की लापरवाह छलाँग ही है।
  469. क़ानून और संस्थाएँदुरुपयोगअधिकार का दुरुपयोग, भले ही औपचारिक रूप से क़ानूनी हो, क़ानून की मूल भावना के विरुद्ध है।
  470. समाज और सामयिक विषयब्याज दर वृद्धिकेंद्रीय बैंक ने पूरे सत्रह साल बाद ब्याज दर बढ़ाने का क़दम उठाया।
  471. शैक्षणिकलाभ; मुनाफ़ाजो प्रबंधन व्यापारिक नैतिकता को हल्के में लेता है, वह अल्पकालिक मुनाफ़े के बदले दीर्घकालिक भरोसा गँवा देता है।
  472. संयोजक और शर्तेंसमझपूरी तरह सहमत न हो, तब भी कम से कम इतना तो दिखाओ कि तुम उसकी स्थिति समझने की कोशिश कर रहे हो।
  473. उन्नत व्यावसायिकहित; स्वार्थसैद्धांतिक रूप से सहमति हो भी जाए, तो ब्योरों पर तालमेल बैठाते ही स्वार्थ टकराने लगते हैं और बात आसान नहीं रहती।
  474. संयोजक और शर्तेंतर्क; दलीलचाहे कितने भी तर्क गिना लो, अगर नतीजे साथ न हों तो कोई नहीं मानेगा।
  475. क़ानून और संस्थाएँनिष्पादन; पालनअगर अनुबंध के दायित्व ईमानदारी से नहीं निभाए जाते, तो दूसरा पक्ष क्षतिपूर्ति की माँग कर सकता है।
  476. शैक्षणिकनौकरी छोड़नाकारक-विश्लेषण के ज़रिए नौकरी छोड़ने की मुख्य पृष्ठभूमि स्पष्ट हो गई।
  477. उन्नत व्यावसायिकजोखिमनिष्कर्ष पर जल्दी पहुँचने के बजाय, क्या हमें जोखिमों पर भी चर्चा गहरी नहीं करनी चाहिए?
  478. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशछँटनीछँटनी की अफ़वाहें फैलने के बाद से दफ़्तर में आपसी शक का माहौल है और हर कोई एक-दूसरे पर नज़र रखे हुए है।
  479. ज़ोर, सीमा और चरमआदर्शहमारे गुरु ने जीवन भर जिस आदर्श का पीछा करना कभी नहीं छोड़ा, वह आज भी हमारा मार्गदर्शक है।
  480. क़ानून और संस्थाएँप्रमाण; सिद्ध करनायह महज़ ज़ुबानी वादा था और कोई लिखित अनुबंध नहीं हुआ, इसलिए इसे साबित करना बेहद कठिन है।
  481. ज़ोर, सीमा और चरमआदर्श; सिद्धांतवह टिप्पणीकार लगातार आलोचना करता रहता है — नीति ढीली है, कोई दृष्टि नहीं — पर एक भी विकल्प नहीं सुझाता।
  482. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशअनुचित; बेतुकाचाहे कितना ही बेतुका छोटा-मोटा काम हो, वरिष्ठ ने समझाया — सब्र का फल मीठा होता है, टिके रहोगे तो एक दिन ज़रूर मिलेगा।
  483. उन्नत केइगो और औपचारिकतासंक्षिप्त रीति (पत्र)संक्षेप में ही सही, मैं यह पत्र सूचना देने के साथ-साथ अभिवादन के रूप में भी लिख रहा हूँ।
  484. उन्नत केइगो और औपचारिकताध्यान; सावधानीसुना है कि अध्यक्ष महोदय अपने स्वास्थ्य का सबसे अधिक ध्यान रखते हैं।
  485. मनोविज्ञान और सूक्ष्म भावविदेश में पढ़ाईविदेश में पढ़ाई की आख़िरी रात इतनी भारी लगी कि मुझे ठीक से नींद ही नहीं आई।
  486. संस्कृति और कलाप्रसार; फ़ैशनकहा जाता है कि वह त्योहार महामारी के प्रकोप को शांत करने के लिए शुरू हुआ था।
  487. संयोजक और शर्तेंलीक; रिसावगोपनीय जानकारी एक बार लीक हो गई, तो उसे पूरी तरह वापस समेटना नामुमकिन है।
  488. समाज और सामयिक विषयप्रवाह; गतिशीलतारोज़गार में गतिशीलता बढ़ाने के साथ-साथ श्रमिकों के लिए सुरक्षा-कवच तैयार करना भी अत्यावश्यक है।
  489. तर्क और वाद-विवादआरक्षण; स्थगनफ़िलहाल मैं अपना निर्णय स्थगित रखना चाहूँगा और अतिरिक्त सामग्री की प्रतीक्षा करूँगा।
  490. मूल्यांकन और अनिवार्यतादुरुपयोग; गबनसरकारी धन को निजी काम में लगाना — किसी लोकसेवक से ऐसा कभी नहीं होना चाहिए।
  491. संयोजक और शर्तेंकारण; वजहजब मेरे गुरु का ही आग्रह भरा अनुरोध हो, तो व्यस्तता का बहाना बनाकर मना करना ठीक नहीं।
  492. मनोविज्ञान और सूक्ष्म भावसमझ; सहमतिकिसी ने कहा तो नहीं, पर यह अलिखित समझ बनी हुई थी कि उस विषय को छुआ नहीं जाएगा।
  493. ज़ोर, सीमा और चरमदोनों देशदोनों देशों में जल्द से जल्द सुलह हो जाए — यही कामना सभी शोकाकुल परिवारों की गहरी, अटूट इच्छा है।
  494. शैक्षणिकक्वांटमक्वांटम कंप्यूटर में वह क्षमता छिपी है कि जो समस्याएँ पारंपरिक मशीनें नहीं सुलझा पातीं, उन्हें एक झटके में हल कर दे।
  495. उन्नत व्यावसायिकदोनों कंपनियांपर्दे के पीछे बार-बार बातचीत के बाद आख़िरकार दोनों कंपनियाँ बुनियादी सहमति तक पहुँच सकीं।
  496. ज़ोर, सीमा और चरमदोनों पक्षमतभेद थोड़े-बहुत भले ही हों, मोटे तौर पर दोनों पक्षों की राय एक जैसी है।
  497. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशमाता-पिताविद्रोही उम्र के बेटे से माता-पिता बुरी तरह परेशान लगते हैं।
  498. जीवन और मूल्यअंतरात्माअंतरात्मा की चुभन सह न पाकर आखिरकार उसने भीतर से ही गड़बड़ी की शिकायत कर दी।
  499. वर्णन और अलंकारपर्वत शिखर रेखादूर के पहाड़ों की चोटी-रेखा पर सुबह का कोहरा पतला और लंबा फैला हुआ था।
  500. उन्नत व्यावसायिकअधिकार; स्वामित्व (क्षेत्र)राजनयिक अधिकारी पड़ोसी देश के साथ क्षेत्रीय दावों पर बातचीत धैर्यपूर्वक जारी रखे हुए हैं।
  501. ज़ोर, सीमा और चरमखाना पकाना; व्यंजनवह सराय, चाहे खाना देखें या मेहमाननवाज़ी, हर लिहाज़ से बेमिसाल थी।
  502. समाज और सामयिक विषयसंतुलन; दोनों का निर्वाहआर्थिक प्रोत्साहन और राजकोषीय अनुशासन को साथ साधना — यह कहना आसान, करना कठिन का सटीक उदाहरण है।
  503. समाज और सामयिक विषयदो पहिए; दो स्तंभसरकार राजकोषीय प्रोत्साहन और नियमन में ढील को एक ही गाड़ी के दो पहिए मानकर विकास-रणनीति गढ़ रही है।
  504. ज़ोर, सीमा और चरमजापानी सरायवह सराय, चाहे खाना देखें या मेहमाननवाज़ी, हर लिहाज़ से बेमिसाल थी।
  505. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशउपयोगबचे हुए माल से फ़र्नीचर बनाओ तो कचरा भी घटेगा और खर्च भी बचेगा — क्या यह एक पंथ दो काज नहीं?
  506. तर्क और वाद-विवादतर्क क्रमउसका प्रतिवाद बेहद सुव्यवस्थित था और हमारे आधारों की कमज़ोरियों पर सटीक चोट करता था।
  507. उन्नत केइगो और औपचारिकतासिद्धांतप्रोफ़ेसर ने जो नया सिद्धांत प्रस्तुत किया है, वह अब तक की मान्यताओं को जड़ से पलट देता है।
  508. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशपरिस्थिति के अनुसार ढलनाअप्रत्याशित हालात में भी वह घबराया नहीं और मौके पर लचीले फ़ैसले लेकर नुक़सान कम से कम रखा।
  509. उन्नत व्यावसायिकपरिपत्र स्वीकृति अनुरोधस्वीकृति-पत्र पहले ही परिचालन में भेज दिया गया है, पर निदेशकों की मंज़ूरी आने में कुछ दिन लगेंगे।
  510. उन्नत व्यावसायिकपड़ोसी देशराजनयिक अधिकारी पड़ोसी देश के साथ क्षेत्रीय दावों पर बातचीत धैर्यपूर्वक जारी रखे हुए हैं।
  511. शैक्षणिकनैतिकताजैव-नैतिकता पर बहस विज्ञान और तकनीक की प्रगति के साथ लगातार जटिल होती जा रही है।
  512. ज़ोर, सीमा और चरमप्रकार; जातिउसकी असाधारण प्रतिभा के बावजूद भी वह कठिन समस्या हल नहीं हो सकी।
  513. शैक्षणिकउदाहरणअमूर्त अवधारणाओं को ठोस उदाहरणों में उतारकर समझाने की क्षमता ही एक श्रेष्ठ शिक्षक की पहचान है।
  514. संस्कृति और कलाशिष्टाचारशिष्टाचार में कभी कमी न आने देना — यही लोगों से मेलजोल का सबसे पहला सलीका है।
  515. जीवन और मूल्यशिष्टाचारजिससे नहीं पटती, उसके साथ भी वयस्क की तरह कम से कम शिष्टाचार निभाना—यही तो कामकाजी इंसान होना है।
  516. उन्नत व्यावसायिकशांत; संयमितजब बहस भावनाओं में बहने लगी, तो उसने माहौल संभालकर शांत भाव से मुद्दों को फिर से व्यवस्थित कर दिया।
  517. संस्कृति और कलाशिष्टाचार; सभ्यताशिष्टाचार से भरी बोलचाल, चाहे असहमति ही क्यों न हो, सामने वाले का मन नहीं दुखाती।
  518. ज़ोर, सीमा और चरमइतिहासलंबे इतिहास वाले विश्वविद्यालय की ही अपनी वह खुली, मुक्त शैक्षणिक हवा यहाँ बहती है।
  519. उन्नत व्यावसायिकस्तरकार्यकारी स्तर पर बातचीत से कुछ नहीं निकला, इसलिए मामला शीर्ष स्तर की बैठक तक ले जाने का निर्णय हुआ।
  520. संयोजक और शर्तेंलगातार छुट्टियाँलंबी छुट्टी का आख़िरी दिन था, इसलिए हाईवे पर जगह-जगह भारी जाम लग गया।
  521. समाज और सामयिक विषयश्रृंखला; चक्रग़रीबी के चक्र को तोड़ने के लिए, मेरी राय में, बच्चों पर निवेश में कंजूसी नहीं करनी चाहिए।
  522. ज़ोर, सीमा और चरमलगातार कई दिनलगातार कई रातें जागते बीतीं, अब तन और मन दोनों थकान की चरम सीमा पर पहुँच चुके हैं।
  523. संयोजक और शर्तेंसंपर्कपहले से एक फ़ोन कर देते तो यह सारी गड़बड़ टल जाती।
  524. संस्कृति और कलाप्रकट होनालोगों के सामने भावनाएँ ज़ाहिर न करना — शायद यही उसका अपना संयत सलीका है।
  525. तर्क और वाद-विवादखेलना; प्रयोग (कुतर्क का)कुतर्क गढ़कर सामने वाले को चुप करा भी दो, तो भी समस्या की जड़ का कुछ हल नहीं होता।
  526. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशजीर्णता; पुरानापनजर्जर हो चुकी व्यवस्था को जड़ से बदलना बेहद श्रमसाध्य काम है, पर इससे बचा नहीं जा सकता।
  527. मूल्यांकन और अनिवार्यताबुढ़ापाजिस बुढ़ापे में जीने का मक़सद ही खो जाए, उससे ज़्यादा अकेला कुछ नहीं।
  528. उन्नत व्यावसायिकश्रमिक और प्रबंधनमालिक और मज़दूर दोनों के धैर्यपूर्वक एक-दूसरे की ओर बढ़ने का नतीजा यह हुआ कि हड़ताल टल गई।
  529. मनोविज्ञान और सूक्ष्म भाववृद्ध गुरुवृद्ध गुरु सांसारिक उत्थान-पतन से ऊपर उठी दृष्टि से चुपचाप अपने युग को निहारते रहे।
  530. ज़ोर, सीमा और चरमरिसाव; लीकजानकारी लीक होने का ख़तरा सिर्फ़ बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं, छोटे-मझोले उद्यमों पर भी है।
  531. वर्णन और अलंकारमोमबत्तीमोमबत्ती की लौ जब-जब काँपती, दीवार पर पड़ती मानव-छाया गहरी होकर फिर मद्धिम पड़ जाती।
  532. समाज और सामयिक विषयश्रमघटती जन्मदर और बढ़ती बुज़ुर्ग आबादी के चलते कामकाजी आबादी के और घटने की गंभीर आशंका है।
  533. शैक्षणिकश्रम; मेहनतजिस समाज में विविध मूल्य साथ-साथ रहते हों, वहाँ सहमति बनाने में भारी परिश्रम लगता है।
  534. शैक्षणिकलॉग; अभिलेखविशाल लॉग की जाँच के बाद पता चला कि ख़राबी के संकेत कई दिन पहले से दिख रहे थे।
  535. वर्णन और अलंकारगलीपुरानी राजधानी की गली में बचा वह चाय-गृह सदियाँ बीतने पर भी अपनी गरिमामय उपस्थिति बनाए हुए था।
  536. मनोविज्ञान और सूक्ष्म भावउजागर होनाहार न मान पाने की अपनी कमज़ोरी उजागर करके उस उम्मीदवार ने मतदाताओं का भरोसा एक झटके में खो दिया।
  537. उन्नत केइगो और औपचारिकतालॉबीएक अतिथि कुछ देर से लॉबी में आपकी प्रतीक्षा कर रहे हैं।
  538. संयोजक और शर्तेंतर्क का आधारइस रिपोर्ट में नतीजों पर जल्दी पहुँचने की प्रवृत्ति है, और उसके तर्क भी कमज़ोर हैं।
  539. तर्क और वाद-विवादनिबंध; शोध-लेखउसके लेख में साहसिक विचारों को सूक्ष्म तर्कों से सहारा दिया गया है, इसलिए कहीं छलाँग महसूस नहीं होती।
  540. तर्क और वाद-विवादतर्क का सारशब्दों को पकड़कर नुक्ताचीनी करना छोड़िए और मेरे तर्क की मूल बात का जवाब दीजिए।
  541. उन्नत केइगो और औपचारिकतातर्क-प्रमाणआपका शोध-पत्र पढ़कर मैं उसकी सूक्ष्म तर्क-प्रणाली से गहराई से प्रभावित हुआ।
  542. तर्क और वाद-विवादचर्चा करना; तर्क करनाजब मूल्यांकन ही सापेक्ष है, तो निरपेक्ष श्रेष्ठता पर बहस करने से कुछ हासिल नहीं।
  543. प्रकृति और जीवनविवादप्रतिभा आनुवंशिकता से आती है या परिवेश से, यह प्राचीन काल से विवाद का विषय रहा है।
  544. भाषा और मीडियातर्क का लहजासभी समाचार संस्थान एक कतार में एक ही सुर अपनाते हैं—इस बात को लेकर मैं लंबे समय से चिंतित रहा हूँ।
  545. उन्नत व्यावसायिकविवाद बिंदु; मुद्दाअगर हमने मुद्दों को एक कदम और पक्का नहीं किया, तो अगले हफ़्ते की बोर्ड बैठक में आड़े हाथों लिए जाएँगे।
  546. ज़ोर, सीमा और चरमशोध पत्रभाषा भले ही कच्ची हो, पर इस शोध-पत्र में एक मौलिक सोच चमकती है।
  547. तर्क और वाद-विवादतर्क-पद्धति"सब यही कहते हैं" वाली दलील बहुसंख्या के बल पर टिकी एक क्लासिक कुतर्क है।
  548. तर्क और वाद-विवादतर्कयह अंत संयोग नहीं था; यह शुरुआती परिस्थितियों से तर्कसंगत ढंग से निकला अनिवार्य परिणाम था।
  549. मूल्यांकन और अनिवार्यताविकृति; तोड़-मरोड़जिसका काम प्रेस की आज़ादी की रक्षा करना है, वही तथ्यों को तोड़-मरोड़े — यह किसी लेखनी के व्यक्ति के लिए अशोभनीय विश्वासघात है।
  550. ज़ोर, सीमा और चरमसुलहदोनों देशों में जल्द से जल्द सुलह हो जाए — यही कामना सभी शोकाकुल परिवारों की गहरी, अटूट इच्छा है।
  551. संयोजक और शर्तेंजवान; युवाइसे जवानी की भूल कहकर बात ख़त्म की जा सकती है, फिर भी ज़िम्मेदारी से वह बच नहीं सकता।
  552. ज़ोर, सीमा और चरमयुवा; नौजवानराजनीति के प्रति उदासीनता सिर्फ़ युवाओं तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
  553. मनोविज्ञान और सूक्ष्म भावविदाई; जुदाई"आपकी सफलता की कामना करता हूँ" — इस एक पंक्ति में विदाई का छिपा हुआ संकेत पढ़ा जा सकता था।
  554. मनोविज्ञान और सूक्ष्म भावविदा का क्षणबिछड़ते वक़्त कही उसकी वह एक बात मेरे सीने में देर तक गूँजती रही, कभी मिटी ही नहीं।
  555. शैक्षणिकबँट जानाकला में सार्वभौमिकता खोजी जाए या उसके युग की छाप को ही सराहा जाए — इस पर मत बँटे हुए हैं।
  556. वर्णन और अलंकारहमारा; मेराइन शर्तों को मान लेना हमारी कंपनी की स्वायत्तता छोड़ देने के बराबर होगा।
  557. मूल्यांकन और अनिवार्यतास्वयं; अपना शरीरजब भी मैं अपनी नासमझी पर सोचता हूँ, गहरी शर्मिंदगी से भर जाता हूँ।
  558. संस्कृति और कलामेरा घरहमारे घर में साल के आख़िरी दिन पूरे बरस की धूल झाड़ना पुरानी परंपरा है।
  559. वर्णन और अलंकारबगल; पार्श्वमंदिर की ओर जाते रास्ते के किनारे काई से ढकी एक जिज़ो मूर्ति चुपचाप खड़ी थी।
  560. संस्कृति और कलाजानना; समझना (शिष्टाचार)अगर विवाह-अंत्येष्टि जैसे अवसरों के शिष्टाचार नहीं जानते, तो बड़े होकर शर्मिंदा होना पड़ सकता है।
  561. संयोजक और शर्तेंउबलनादस साल बाद मिली जीत थी, इसलिए पूरा शहर जश्न में डूब गया।
  562. तर्क और वाद-विवादढाँचाहर सृजन की जड़ में मौजूदा ढाँचों के प्रति एक ख़ामोश असंतोष छिपा रहता है।
  563. प्रकृति और जीवनटीकाटीके से प्राप्त प्रतिरक्षा कितने समय तक टिकती है, इसका बड़ा हिस्सा अब भी अस्पष्ट है।
  564. समाज और सामयिक विषयबाँटनाविकलांगता हो या न हो, हर कोई बिना भेदभाव जी सके — ऐसा समाज ही हमारा लक्ष्य होना चाहिए।
  565. संस्कृति और कलाकौशलपीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होती आई यह कला वास्तव में जीवित धरोहर कहलाने योग्य है।
  566. क़ानून और संस्थाएँविपत्ति; आफ़तनौकरशाही के अलग-थलग विभागीय ढाँचे के चलते एक ही आवेदन विभाग-दर-विभाग टलता रहता है।
  567. मूल्यांकन और अनिवार्यताजान-बूझकर; ख़ास तौर परइतनी छोटी-सी पुष्टि के लिए ख़ास तौर पर अध्यक्ष को रिपोर्ट करने की कोई ज़रूरत नहीं।
  568. भाषा और मीडियापूरी तरह भूल जानासमय के साथ शब्द का मूल भुला दिया जाता है और केवल मुहावरा जीवाश्म की तरह भाषा में टिका रह जाता है।
  569. संयोजक और शर्तेंथोड़ा; मामूलीरकम चाहे कितनी ही छोटी क्यों न हो, जब वह सरकारी धन है तो उसे संभालने में पूरी सावधानी ज़रूरी है।
  570. ज़ोर, सीमा और चरम(बीमारी) से पीड़ित होनागंभीर बीमारी से गुज़रने के बाद से वह सेहत की क़ीमत को दिल से महसूस करने लगा है।
  571. ज़ोर, सीमा और चरमझंझट भरा; परेशान करने वालाखचाखच भरी ट्रेन में रोज़ का सफ़र कितना झंझट भरा है, यह बयान से बाहर है।
  572. क़ानून और संस्थाएँफैला होना; तक चलनाकई दौर की बातचीत के बाद आख़िरकार दोनों पक्ष अनुबंध पर पहुँच सके।
  573. मनोविज्ञान और सूक्ष्म भावचर्चा का विषयकिसी ने कहा तो नहीं, पर यह अलिखित समझ बनी हुई थी कि उस विषय को छुआ नहीं जाएगा।
  574. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशमन में गाँठ पड़नाबरसों की कड़वाहट को भुलाकर दोनों ने फिर से हाथ मिलाने का फ़ैसला किया।
  575. मुहावरे और रूढ़ वाक्यांशपहिये की लीक; वही राहपढ़ाई और कारोबार दोनों एक साथ साधने चला, और दो नावों पर पैर रखने वाले की तरह दोनों बीच में ही अटक गए।
  576. संस्कृति और कलावाबी (सादगी का सौंदर्य)वाबी-साबी उस संवेदना को कहते हैं जो अधूरी और क्षय होती चीज़ों में सुंदरता खोज लेती है।
  577. भाषा और मीडियाक्षमा माँगना"wabiru" और "ayamaru" (दोनों का अर्थ क्षमा माँगना) देखने में समान लगते हैं, पर औपचारिक अवसरों पर उनके भाव का अंतर मायने रखता है।
  578. वर्णन और अलंकारविभाज्य होना; स्पष्ट रूप से सुलझनाउसकी लेखनी में ऐसी छायाएँ अंकित हैं जिन्हें सीधे-सादे भले-बुरे में नहीं बाँटा जा सकता।
  579. मनोविज्ञान और सूक्ष्म भावखोलना; तोड़नाबात यहाँ तक पहुँच गई है, तो जब तक हम एक बार खुलकर, दिल की बात न कर लें, यह खाई नहीं पटेगी।
  580. संयोजक और शर्तेंहमजब उद्योग की सबसे बड़ी कंपनी ही मैदान में उतर आई है, तो हमें भी अपनी रणनीति पर जड़ से दोबारा सोचना पड़ेगा।
  581. वर्णन और अलंकाररुकना; समाप्तियह बेहद असाधारण क़दम है, पर आपात स्थिति में इसके सिवा चारा नहीं।
  582. मूल्यांकन और अनिवार्यताभूलना (प्राचीन)"अपना पहला संकल्प कभी मत भूलो" — यह वह सूत्र है जो ज़ेआमी ने कला-मार्ग के सार के रूप में छोड़ा।
  583. शैक्षणिकसीमा मान; थ्रेशोल्डसिस्टम इस तरह बनाया गया है कि संकेत एक निश्चित सीमा पार करते ही वह अपने आप चेतावनी दे देता है।
  584. वर्णन और अलंकारधुंध; कुहासातड़के झील की सतह पर हल्का-सा कुहासा छाया हुआ था।